छः विद्युत परमाणु विद्युत गृह

परमाणु शक्ति- जब उच्च अणुभार वाले परमाणु विखंडित होते हैं तो ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। यूरेनियम परमाणु ऊर्जा का कच्चा माल है। भारत में यूरेनियम का विशाल भंडार झारखण्ड के जादूगोड़ा में है।

भारत में 1955 में प्रथम आण्विक रियेक्टर मुम्बई के निकट तारापुर में स्थापित किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य उद्योग एवं कृषि को बिजली प्रदान करना था।

देश में अब तक छः विद्युत परमाणु विद्युत गृह स्थापित किए गए हैं।

  1. तारापुर परमाणु विद्युत गृह- यह एशिया का सबसे बड़ा परमाणु विद्युत गृह है।
  2. राणाप्रताप सागर परमाणु विद्युत गृह- यह राजस्थान के कोटा में स्थापित है। यह चंबल नदी के किनारे है।
  3. कलपक्कम परमाणु विद्युत गृह- यह तमिलनाडु में स्थित है।
  4. नरौरा परमाणु विद्युत गृह- यह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के पास स्थित है।
  5. ककरापारा परमाणु विद्युत गृह- यह गुजरात राज्य में समुद्र के किनारे स्थित है।
  6. कैगा परमाणु विद्युत गृह- यह कर्नाटक राज्य के जागवार जिला में स्थित है।

भारत के मुख्य बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

भारत के मुख्य बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

बहुउद्देशीय परियोजना- ऐसी परियोजना जिससे एक साथ अनेक लाभ के प्राप्त की जा सके, उसे बहुउद्देशीय परियोजना कहते हैं।

अर्थात्

ऐसी परियोजना जिससे एक साथ कई उद्देश्य प्राप्त करने के लिए स्थापित किए जाते हैं, उसे बहुउद्देशीय परियोजना कहते हैं।

  1. भाखड़ा-नंगल परियोजना- भाखड़ा नंगल बाँध विश्व की ऊँची बाँधों में से एक है, जो हिमालय क्षेत्र में सतलज नदी पर है। जिसकी ऊँचाई 225 मीटर है। यह भारत की सबसे बड़ी परियोजना है। इससे 7 लाख किलोवाट विद्युत उत्पन्न किया जाता है।
  2. दामोदरघाटी परियोजना– यह परियोजना दामोदर नदी पर झारखंड और पश्चिम बंगाल को बाढ़ से बचाने के लिए किया गया है। इससे 1300 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है।
  3. कोशी परियोजना- नेपाल स्थित हनुमान नगर में कोशी नदी पर बाँध बनाकर इस परियोजना से 20000 किलोवाट बिजली उत्पन्न किया जाता है।
  4. रिहन्द परियोजना- इस परियोजना को सोन की सहायक नदी रिहन्द पर उŸार प्रदेश में 934 मीटर लंबा बाँध बनाकर किया गया है। इससे 30 लाख किलोवाट बिजली उत्पादन किया जाता है।
  5. हीराकुंड परियोजना- उड़ीसा के महानदी पर विश्व का सबसे लंबा बाँध बनाकर 2.7 लाख किलोवाट बिजली उत्पादन किया जाता है।
  6. चंबल घाटी परियोजना- चंबल नदी पर राजस्थान में तीन बाँध गाँधी सागर, राणाप्रताप सागर और कोटा में स्थापित कर तीन शक्ति गृहों की स्थापना कर 2 लाख मेगावाट बिजली उत्पादन किया जाता है।
  7. तुंगभद्रा परियोजना- यह दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी-घाटी परियोजना है, जो कृष्णा नदी की सहायक नदी तुंगभद्रा नदी पर बनाई गई है।

कोयले का वर्गीकरण

कोयले का वर्गीकरणः- कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयला को चार वर्गों में रखा गया हैः

  1. ऐंथासाइटः- यह सर्वोच्य कोटि का कोयला है जिसमें कार्बन की मात्रा 90% से अधिक होती है। जलने पर यह धुँआ नही देता है।
  2. बिटुमिनसः- यह 70 से 90% कार्बन की मात्रा धारण किये हुए रहता है तथा इसे पारिष्कृत कर कोकिंग कोयला बनाया जा सकता है। भारत का अधिकतर कोयला इसी श्रेणी का है।
  3. लिग्नाईटः- यह निम्न कोटि का कोयला माना जाता है जिसमें कार्बन की मात्रा 30 से 70% होता है। यह कम ऊष्मा तथा अधिक धुआँ देता है।
  4. पीटः- इसमें कार्बन की मात्रा 30% से भी कम पाया जाता है। यह पूर्व के दलदली भागों में पाया जाता है।

गांडवाला समूह का कोयला क्षेत्रः-

झारखण्ड – कोयले के भण्डार एवं उत्पादन की दृष्टि से झारखण्ड का देश में पहला स्थान है। यहाँ देश का 30 प्रतिशत से भी अधिक कोयला का सुरक्षित भण्डार है। झरिया, बोकारो, गिरिडीह, कर्णपुरा, रामगढ़ इस राज्य के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। पश्चिम बंगाल के रानीगंज कोयला क्षेत्र का कुछ भाग इसी राज्य में पड़ता है।

छत्तीसगढ़ः- सुरक्षित भण्डार की दृष्टि से इस राज्य का स्थान तीसरा किन्तु उत्पादन में यह भारत का दूसरा बड़ा राज्य है। यहाँ देश का 15 प्रतिशत सुरक्षित भण्डार है लेकिन उत्पादन 16 प्रतिशत होता है।

उड़िसाः- उड़िसा में एक चौथाई कोयले का भण्डार है पर उत्पादन मात्र 14.6 प्रतिशत ही होता है।

टर्शियरिय कोयला क्षेत्रः- टर्शियरी युग में बना कोयला नया एवं घटिया किस्म का होता है। यह कोयला मेघालय मे दारगिरी, चेरापूंजी, लेतरिंग्यू, माओलौंग और लांगरिन क्षेत्र से निकाला जाता है। ऊपरी असम में माकुम, जयपुर, नजिरा आदि कोयले के क्षेत्र हैं। अरूणाचल प्रदेश में नामचिक और नामरूक कोयला क्षेत्र है। जम्मू और कश्मिर में कालाकोट से कोयला निकाला जाता हैं।

लिग्नाइट कोयला क्षेत्र :

यह एक निम्न कोटि का कोयला होता है। इसमें नमी ज्यादा तथा कार्बन कम होता है। इसलिए यह अधिक धुँआ देता है। लिग्नाइट कोयले का भण्डार मुख्य रूप से तमिलनाडु के लिग्नाइट वेसिन में पाया जाता है। जहाँ देश का 94 प्रतिशत लिग्नाइट कोयले का सुरक्षित भंडार है।

सोन नदी-घाटी परियोजना

सोन नदी-घाटी परियोजना : सोन नदी-घाटी परियोजना बिहार की सबसे प्राचीन परियोजना के साथ-साथ यहाँ की पहली परियोजना है। ब्रिटिश सरकार ने सिंचित भूमि में वृद्धि कर अधिकाधिक फसल उत्पादन की दृष्टि से इस परियोजना का विकास 1874 ई० में किया था ।

सुविकसित रूप से यह नहर तीन लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करती हैं। 1968 ई० में इस योजना के डेहरी से 10 किमी० की दूरी पर स्थित इंद्रपुरी नामक स्थान पर बांध लगाकर बहुउद्देशीय परियोजना का रूप देने का प्रयास किया गया। इससे पुराने नहरों, जल का बैराज से पुनर्पूर्ति, नहरी विस्तारीकरण एवं सुदृढ़ीकरण हुआ है। यही वजह है कि सोन का यह सूखाग्रस्त प्रदेश आज बिहार का ‘चावल का कटोरा’ (त्पबम ठवूस वि ठपींत) के नाम से विभूषित हो रहा है।

इस परियोजना के अंर्तगत जल-विद्युत उत्पादन के लिए शक्ति-गृह भी स्थापित हुए हैं। पश्चिमी नहर पर डेहरी के समीप शक्ति-गृह की स्थापना की गई है। जिससे 6.6 मेगावाट ऊर्जा प्राप्त होती है। इस ऊर्जा का उपयोग डालमियानगर का एक बड़े औद्योगिक-प्रतिष्ठान के रूप में उभर रहा है।

बिहार विभाजन के पूर्व ‘इंद्रपुरी जलाशय योजना’, ‘कदवन जलाशय योजना’ के नाम से जानी जाती थी।

इसके अतिरिक्त भी बिहार के अंर्तगत कई नदी घाटी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं; जिसके विकास की आवश्यकता है। जिनमें दुर्गावती जलाशय परियोजना, ऊपरी किऊल जलाशय परियोजना, बागमती परियोजना तथा बरनार जलाशय परियोजना इत्यादि शामिल है ।

मृदा के प्रकार एवं वितरण

मृदा के प्रकार एवं वितरण :

मृदा निर्माण की प्रक्रिया के निर्धारक तŸव, उनके रंग-गठन, गहराई, आयु व रासायनिक और भौतिक गुणों के आधार पर भारत की मृदा के छः प्रकार होते हैं।

  1. जलोढ़ मृदा

यह मृदा भारत में विस्तृत रूप में फैली हुई सर्वाधिक महŸवपूर्ण मृदा है। उत्तर भारत का मैदान पूर्ण रूप से जलोढ़ निर्मित है, जो हिमालय की तीन महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों सिंधु, गंगा और बह्मपुत्र द्वारा लाए गए जलोढ़ के निक्षेप से बना है।

कुल मिलाकर भारत के लगभग 6.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र पर जलोढ़ मृदा फैली हुई है।

जलोढ़ मिट्टी का गठन बालू, सिल्ट एवं मृत्तिका के विभिन्न अनुपात से होता है। इसका रंग धुँधला से लेकर लालिमा लिये भूरे रंग का होता है।

ऐसी मृदाएँ पर्वतीय क्षेत्र में बने मैदानों में आमतौर पर मिलती हैं। आयु के आधार पर जलोढ़ मृदा के दो प्रकार हैं- पुराना एवं नवीन जलोढ़।

पुराने जलोढ़ में कंकड़ एवं बजरी की मात्रा अधिक होती है। इसे बांगर कहते हैं। यह ज्यादा उपजाऊ नहीं होते हैं।

बांगर की तुलना में नवीन जलोढ़ में महीन कण पाये जाते हैं, जिसे खादर कहा जाता है। खादर में बालू एवं मृत्तिका का मिश्रण होता है। ये काफी उपजाऊ होते हैं।

उत्तर बिहार में बालू प्रधान जलोढ़ को ‘दियारा भूमि‘ कहते हैं। यह मक्का की कृषि के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

जलोढ़ मृदा में पोटाश, फास्फोरस और चूना जैसे तŸवों की प्रधानता होती है, जबकि नाइट्रोजन एवं जैव पदार्थों की कमी रहती है। यह मिट्टी गन्ना, चावल, गेहूँ, मक्का, दलहन जैसी फसलों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

अधिक उपजाऊ होने के कारण इस मिट्टी पर गहन कृषि की जाती है। जिसके कारण यहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक होता है।

  1. काली मृदाः

इस मिट्टी का रंग काला होता है जो इसमें उपस्थित एल्युमीनियम एवं लौह यौगिक के कारण है। यह कपास की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है। जिस कारण इसे ‘काली कपास मृदा‘ के नाम से भी जाना जाता है।

इस मिट्टी की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें नमी धारण करने की क्षमता अत्यधिक होती है। यह मृदा कैल्शियम कोर्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूना जैसे पौष्टिक तŸवों से परिपूर्ण होती है। इसमें फास्फोरस की कमी होती है।

  1. लाल एवं पीली मृदा :

इस मृदा में लोहा के अंश होने के कारण लाल होता है। जलयोजन के पश्चात यह मृदा पीले रंग की हो जाती है। जैव पदार्थों की कमी के कारण यह मृदा जलोढ़ एवं काली मृदा की अपेक्षा कम उपजाऊ होती है। इस मृदा में सिंचाई की व्यवस्था कर चावल, ज्वार-बाजरा, मक्का, मूंगफली, तम्बाकू और फलों का उत्पादन किया जा सकता है।

  1. लैटेराइट मृदा :

इस प्रकार की मिट्टी का विकास उच्च तापमान एवं अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में हुआ है। इस मृदा में ह्यूमस की मात्रा नगण्य होती है। यह मिट्टी कठोर होती है। अल्युमीनियम और लोहे के ऑक्साइड के कारण इसका रंग लाला होता है।

कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में मृदा संरक्षण तकनीक के सहारे चाय एवं कहवा का उत्पादन किया जाता है। तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और केरल में इस मृदा में काजू की खेती उपयुक्त मानी जाती है।

  1. मरूस्थलीय मृदा :

इस मृदा का रंग लाल या हल्का भूरा होता है। इस प्रकार की मृदा में वनस्पति और उर्वरक का अभाव पाया जाता है। किन्तु, सिंचाई की व्यवस्था कर कपास, चावल, गेहूँ का भी उत्पादन किया जा सकता है।

  1. पर्वतीय मृदा :

पर्वतीय मृदा प्रायः पर्वतीय और पहाड़ी क्षेत्रों में देखने को मिलती है। यह मृदा अम्लीय और ह्यूमस रहित होते हैं। इस मृदा पर ढ़ालानों पर फलों के बगान एवं नदी-घाटी में चावल एवं आलू का लगभग सभी क्षेत्रों में उत्पादन किया जाता है।

BSEB: Ragistration dates for class IX students for Matric Exam, 2023

registration date for matric exam 2023
bihar board 10th registration last date 2023

Ragistration dates for class IX students

Ragistration dates for class IX students बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2023 सत्र (2022-2023) के‍ लिए राज्‍य सरकार के शिक्षण संस्‍थानों में 9वीं कक्षा में पढ़ रहे विद्यार्थियों के उनके शिक्षण संस्‍थान द्वारा रजिस्‍ट्रेशन किये जाने हेतु तिथि की घोषण की गई है। आवेदन करने की तिथि 11.07.2021 से 31.07.2021 तक है। राज्‍य के माध्‍यमिक स्‍तर के प्रधान अपने संस्‍थान के 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के आवेदन की ऑनलाइन निम्नलिखित वेबसाइट पर करेंगे। समिति के वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन फॉर्म की प्रति अपलोड है।

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अतः शिक्षण संस्थानों के प्रधान सबसे पहले वेबसाइट http://secondary.biharboardonline.com से रजिस्ट्रेशन फॉर्म डाउनलोड कर सभी विद्यार्थियों को भरने के लिए उपलब्ध करा देंगे। भरे गए फॉर्म विद्यार्थियों से प्राप्त करने के बाद प्रधान अपने विद्यालय के अभिलेख से उसका मिलान करेंगे और उसे ऑनलाइन भरेंगे।

विद्यार्थी यदि अपने द्वारा भरे गए फॉर्म में त्रुटि पाते हैं तो उसमें आवश्यक संशोधन करते हुए अपने हस्ताक्षर के साथ अपने विद्यालय प्रधान को उपलब्ध करा देंगे, जिसके आधार पर विद्यालय प्रधान ऑनलाइन रूप से उसमें आवश्यक संशोधन करेंगे।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने एवं शुल्क जमा करने में किसी प्रकार की असुविधा होने पर हेल्पलाइन नं0- 0612-2232074, 2232257 एवं 2232239 पर संपर्क किया जा सकता है।

शुल्क का भुगतान ऑनलाइन रुप से या ई-चालान के माध्यम से या NEFT के माध्यम से किया जा सकता है।

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Raiyatwari Vyavastha | रैयतवाड़ी व्यवस्था से क्‍या समझते हैं

Raiyatwari Vyavastha

रैयतवारी व्यवस्था किसे कहते हैं (Raiyatwari Vyavastha)-

  • एक नई व्यवस्था दक्षिण एवं पश्चिम भारत में रैयतवारी व्यवस्था के नाम से शुरू की गई।
  • इसमें किसानों के साथ सीधा करार किया गया।
  • सन् 1802 में मद्रास के तत्कालीन गवर्नर टॉमस मुनरो ने रैयतवाड़ी व्यवस्था आरंभ की।
  • यह व्यवस्था 1792 ई. में मद्रास प्रैज़िडन्सी के बारामहल जिले में सर्वप्रथम लागू की गई
  • यह व्यवस्था मद्रास, बंबई एवं असम के कुछ भागों में लागू की गई।
  • इस व्‍यवस्‍था के तहत लगभग 51 प्रतिशत भूमि आई।
  • इन इलाकों में परंपरागत रूप से जमींदार नहीं होते थे इसलिए कंपनी सरकार ने किसी नए व्यक्ति को जमींदार बना कर स्थापित करने की जगह सीधा किसानों से ही संबंध स्थापित किया।
  • इस व्यवस्था में लगान उपज के आधार पर तय हुआ।
  • पहले जमीन की गुणवत्ता देखी गई, फिर पिछले कुछ वर्षों की उपज का औसत निकाला गया, उसमें किसानों की खेती पर होने वाले खर्च को काट कर जो बचता था उसका 50 प्रतिशत लगान के रूप में तय कर दिया गया।
  • इसे स्थायी नहीं बनाया गया।
  • प्रत्येक 30 वर्ष बाद लगान की राशि में बदलाव किया जाना तय किया गया।
  • इस व्यवस्था में किसानों को जमीन का मालिक माना गया था।
  • भूमिदार के पास भूमि को रहने, रखने व बेचने का अधिकार होता था।
  • इस व्‍यवस्‍था के कारण किसान गरीब तथा भूमिहीन हो गए  तथा ऋणग्रस्तता में फँसकर रह गये।
  • थॉमस मुनरो 1819 ई. से 1826 ई. के बीच मद्रास का गवर्नर रहा। रैयतवाड़ी व्यवस्था के प्रारंभिक प्रयोग के बाद मुनरो ने इसे 1820 ई. में संपूर्ण मद्रास में लागू कर दिया।

पाटलिपुत्रवैभवम् कक्षा 10 संस्‍कृत | Patliputra Vaibhavam Objective

इस पोस्‍ट में बिहार बोर्ड के कक्षा 10 संस्‍कृत के पाठ एक ‘मङ्गलम्’ (Patliputra Vaibhavam Objective) के महत्‍वपूर्ण ऑब्‍जेक्टिव प्रश्‍नोत्तर को पढ़ेंगे।

patliputra vaibhavam objective

Patliputra Vaibhavam Objective पाठ 2 पाटलिपुत्रवैभवम्

अभ्यास प्रश्नोत्तर

1. मेगास्थनीज पटना किसके समय में आया था ?

(A) अशोक के समय में

(B) मुगलवंश काल में

(C) चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में

(D) अंग्रेजों के समय में

उत्तर- (C) चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में

2. ‘पाटलपुष्पों की पुत्तलिका‘ रचना के आधार पर पटना का कौन-सा नाम है ?

(A) पुष्पपुर

(B) कुसुमपुर

(C) पाटलिपुत्र

(D) पटना

उत्तर- (C) पाटलिपुत्र

3. पटना में कौमुदी महोत्सव कब मनाया जाता था ?

(A) गुप्तवंश काल में

(B) मुगलवंश काल में

(C) मध्यकाल में

(D) अंग्रेजों के समय में

उत्तर- (A) गुप्तवंश काल में

4. पाटलिपुत्र पटना के नाम से कब से प्रसिद्ध हुआ ?

(A) गुप्तवंश काल से

(B) मुगलवंश काल से

(C) मध्यकाल से

(D) अंग्रेजों के समय से

उत्तर- (C) मध्यकाल से

5. पटना का इतिहास कितना पुराना है?

(A) 2500 वर्ष

(B) 2000 वर्ष

(C) 1500 वर्ष

(D) 1000 वर्ष

उत्तर- (A) 2500 वर्ष

6. कुटनिमताख्य काव्य के कवि कौन हैं ?

(A) राजशेखरः

(B) दामोदर गुप्तः

(C) विशाखादत्त

(D) कालिदासः

उत्तर- (B) दामोदर गुप्तः

7. यूनान का राजदूत कौन था ?

(A) फाह्यान

(B) ह्वेनसांग

(C) मेगास्थनीज

(D) इत्सिंग

उत्तर- (C) मेगास्थनीज

8. राजशेखरः की रचना कौन-सी है ?

(A) काव्यमीमांसा

(B) कुट्टनीमताख्य

(C) मुद्राराक्षस

(D) यात्रा संस्मरण

उत्तर- (A) काव्यमीमांसा

9. कौमुदी महोत्सव किस ऋतु में मनाया जाता था ?

(A) बसन्त ऋतु में

(B) वर्षा ऋतु में

(C) ग्रीष्म ऋतु में

(D) शरद ऋतु में

उत्तर- (D) शरद ऋतु में

10. पटना नगर की पालिका देवी कौन है ?

(A) शीतला देवी

(B) काली

(C) चंडी

(D) पटन देवी

उत्तर- (D) पटन देवी

11. सरस्वती का कुलगृह कौन-सा महानगर था? (2018A ІІ)

(A) भागलपुर

(B) नालन्दा

(C) पाटलिपुत्र

(D) दरभंगा

उत्तर- (C) पाटलिपुत्र

12. ‘परिभूतपुरन्दरस्थानम्‘ की संज्ञा किसे दी गई है ?

(A) पाटलिपुत्र नगर

(B) गुप्तवंश

(C) बुद्ध

(D) राजशेखर

उत्तर- (A) पाटलिपुत्र नगर

13. गुरु गोविंद सिंह का जन्म स्थल कहाँ है ?

(A) पटना

(B) भागलपुर

(C) राजगीर

(D) पंजाब

उत्तर- (A) पटना

14. ‘वैरेण वैरस्य शमनम् असम्भवम्‘ यह किसकी कथन है ?

(A) महात्मा गाँधी

(B) महात्मा बुद्ध

(C) कर्ण

(D) चन्द्रगुप्त

उत्तर- (B) महात्मा बुद्ध

15. किसके काल में पाटलिपुत्र की रक्षा व्यवस्था उत्कृष्ट थी ?

(A) चन्द्रगुप्त मौर्य

(B) समुद्रगुप्त

(C) कुमारगुप्त

(D) इनमें कोई नहीं

उत्तर- (A) चन्द्रगुप्त मौर्य

16. सिखों के दसवें गुरु कौन थे ?

(A) गुरु नानक

(B) गुरु तेगबहादुर

(C) गुरु गोविंद सिंह

(D) गुरु रामदास

उत्तर- (C) गुरु गोविंद सिंह

17. पाटलिपुत्र किस प्रांत की राजधानी है ?

(A) बिहार

(B) केरल

(C) झारखंड

(D) पश्चिम बंगाल

उत्तर- (A) बिहार

18. ‘पाटलिपुत्र वैभवम्‘ पाठ में किस शहर का वर्णन है ?

(A) भागलपुर

(B) इलाहाबाद

(C) पटना

(D) कलकत्ता

उत्तर- (C) पटना

19. दामोदर गुप्त ने किस काव्य की रचना की ?

(A) कुटनीमताख्‍य

(B) काव्य मीमांसा

(C) मुद्राराक्षस

(D) मृच्छकटिक

उत्तर- (A) कुटनीमताख्‍य

मंङ्गलम् कक्षा 10 संस्‍कृत | mangalam path sanskrit objective

इस पोस्‍ट में बिहार बोर्ड के कक्षा 10 संस्‍कृत के पाठ एक ‘मङ्गलम्‘(mangalam path sanskrit objective) के महत्‍वपूर्ण ऑब्‍जेक्टिव प्रश्‍नोत्तर को पढ़ेंगे।

mangalam path sanskrit objective

mangalam path sanskrit objective संस्‍कृत पाठ 1 मंङ्गलम्

अभ्यास प्रश्नोत्तर

  1. ‘मङ्गलम्‘ पाठ में कितने मंत्र हैं ?

(क) एक

(ख) दो

(ग) तीन

(घ) पाँच

उत्तर- (घ) पाँच

  1. सत्य का मुँह किस पात्र से ढ़का हुआ है ?

(क) असत्य से

(ख) हिरण्मय पात्र से

(ग) स्वार्थ से

(घ) अशांति से

उत्तर- (ख) हिरण्मय पात्र से

  1. ‘सत्यमेव जयते‘ किस उपनिषद् से लिया गया है ?

(क) ईशावास्योपनिषद्

(ख) मुण्डकोपनिषद्

(ग) कठोपनिषद्

(घ) वृहदारण्यकोपनिषद्

उत्तर- (ख) मुण्डकोपनिषद्

  1. ‘हिरण्मयेन पात्रेण…..दृष्टये‘ किस उपनिषद् से लिया गया है ?

(क) ईशावास्योपनिषद्

(ख) मुण्डकोपनिषद्

(ग) कठोपनिषद्

(घ) वृहदारण्यकोपनिषद्

उत्तर- (क) ईशावास्योपनिषद्

  1. ‘वेदा हमेतं पुरुषं महान्तम्…..विद्यतेऽयनाय‘ किस उपनिषद् से लिया गया है ?

(क) ईशावास्योपनिषद्

(ख) मुण्डकोपनिषद्

(ग) श्वेताश्वतरोपनिषद्

(घ) वृहदारण्यकोपनिषद्

उत्तर- (ग) श्वेताश्वतरोपनिषद्

mangalam path sanskrit objective संस्‍कृत पाठ 1 मंङ्गलम्

  1. ‘मंगलम्‘ पाठ कहाँ से संकलित है ?

(क) वेद से

(ख) उपनिषद् से

(ग) पुराण से

(घ) वेदांग से

उत्तर- (ख) उपनिषद् से

  1. ‘अणोरणीयान् महतो………महिमानमात्मनः‘ किस उपनिषद् से लिया गया है ?

(क) ईशावास्योपनिषद्

(ख) मुण्डकोपनिषद्

(ग) कठोपनिषद्

(घ) वृहदारण्यकोपनिषद्

उत्तर- (ग) कठोपनिषद्

  1. महान से महान क्या है?

(क) आत्मा

(ख) देवता

(ग) ऋषि

(घ) दानव

उत्तर- (क) आत्मा

  1. किसकी विजय होती है ?

(क) सत्य की

(ख) असत्य की

(ग) धर्म की

(घ) सत्य और असत्य दोनों की

उत्तर- (क) सत्य की

  1. नदियाँ नाम और रूप को छोड़कार किसमें मिलती है?

(क) समुद्र में

(ख) मानसरोवर में

(ग) तालाब में

(घ) झील में

उत्तर- (क) समुद्र में

  1. किसकी विजय नहीं होती है ?

(क) सत्य की

(ख) असत्य की

(ग) धर्म की

(घ) सत्य और असत्य दोनों की

उत्तर- (ख) असत्य की

  1. यह संपूर्ण संसार किसके द्वारा अनुशासित है ?

(क) आत्मा

(ख) परमात्मा

(ग) साहित्य

(घ) इनमें कोई नहीं

उत्तर- (ख) परमात्मा

Naubatkhane Me Ibadat VVI Subjective Questions – हिन्‍दी कक्षा 10 नौबतखाने में इबादत

इस पोस्‍ट में हमलोग बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिन्‍दी के पाठ ग्‍यारह ‘नौबतखाने में इबादत (Naubatkhane Me Ibadat VVI Subjective Questions)’ के महत्‍वपूर्ण विषयनिष्‍ठ प्रश्‍नों के उत्तर को पढ़ेंगे।

Naubatkhane Me Ibadat VVI Subjective Questions

Hindi Naubatkhane Me Ibadat VVI Subjective Questions नौबतखाने में इबादत

      लेखक-यतींद्र मिश्र

लघु-उत्तरीय प्रश्न (20-30 शब्दों में)____दो अंक स्तरीय
प्रश्न 1. बिस्मिल्ला खाँ सजदे में किस चीज के लिए गिड़गिड़ाते थे? इससे उनके व्यक्तित्व का कौन-सा पक्ष उद्घाटित होता है?                  (Text Book)
उत्तर- बिस्मिल्ला खाँ जब इबादत में खुदा के समाने झुकते तो सजदे में गिड़गिड़ाकर खुदा से सच्चे सुर का वरदान माँगते । इससे पता चलता है कि खाँ साहब धार्मिक, संवेदनशील एवं निरभिमानी थे। संगीत-साधना हेतु समर्पित थे। अत्यन्त विनम्र थे।

प्रश्न 2. सूषिर वाद्य किन्हें कहा जाता है? ’शहनाई’ शब्द की व्यत्पत्ति किस प्रकार हुई है? (Text Book)
उत्तर- सुषिर वाद्य ऐसे वाद्य हैं, जिनमें नाड़ी (नरकट या रीड) होती है, जिन्हें फूंककर बजाया जाता है। अरब देशों में ऐसे वाद्यों को ‘नय‘ कहा जाता है और उनमें शहनाई को ‘शाहनेय‘ अर्थात् ‘सूषिर वाद्यों में शाह‘ की उपाधि दी गई है, क्योंकि यह वाद्य मुरली, शृंगी जैसे अनेक वाद्यों से अधिक मोहक है।.

प्रश्न 3, ’संगीतमय कचौड़ी’ का आप क्या अर्थ समझते हैं? (Text Book)
उत्तर- कुलसुम हलवाइन की कचौड़ी को संगीतमय कहा गया है। वह जब बहुत गरम घी में कचौड़ी डालती थी, तो उस समय छन्न से आवाज उठती थी जिसमें कमरुद्दीन को संगीत के आरोह-अवरोह की आवाज सुनाई देती थी। इसीलिए कचौड़ी को ’संगीतमय कचौड़ी’ कहा गया है।

प्रश्न 4. डुमराँव की महत्ता किस कारण से है? (पाठ्य पुस्तक, 2012A, 2015A)
उत्तर- डुमराँव की महत्ता शहनाई के कारण है। प्रसिद्ध शहनाईवादक बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव में हुआ था। शहनाई बजाने के लिए जिस ’रीड’ का प्रयोग होता है, जो एक विशेष प्रकार की घास ’नरकट’ से बनाई जाती है, वह डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है।

प्रश्न 5. बिस्मिल्ला खाँ जब काशी से बाहर प्रदर्शन करते थे तो क्या करते थे? इससे हमें क्या सीख मिलती है?                                              (पाठ्य पुस्तक)
उत्तर- बिस्मिल्ला खाँ जब कभी काशी से बाहर होते तब भी काशी विश्वनाथ को नहीं भूलते। काशी से बाहर रहने पर वे उस दिशा में मुँह करके थोड़ी देर तक शहनाई अवश्य बजाते थे। इससे हमें धार्मिक दृष्टि से उदारता एवं समन्वयता की सीख मिलती है। हमें धर्म को लेकर किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं रखना चाहिए।

प्रश्न 4. डुमराँव की महत्ता किस कारण से है? (पाठ्य पुस्तक, 2012A, 2015A)
उत्तर- डुमराँव की महत्ता शहनाई के कारण है। प्रसिद्ध शहनाईवादक बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव में हुआ था। शहनाई बजाने के लिए जिस ’रीड’ का प्रयोग होता है, जो एक विशेष प्रकार की घास ’नरकट’ से बनाई जाती है, वह डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है।

प्रश्न 5. बिस्मिल्ला खाँ जब काशी से बाहर प्रदर्शन करते थे तो क्या करते थे? इससे हमें क्या सीख मिलती है?                                              (पाठ्य पुस्तक)
उत्तर- बिस्मिल्ला खाँ जब कभी काशी से बाहर होते तब भी काशी विश्वनाथ को नहीं भूलते। काशी से बाहर रहने पर वे उस दिशा में मुँह करके थोड़ी देर तक शहनाई अवश्य बजाते थे। इससे हमें धार्मिक दृष्टि से उदारता एवं समन्वयता की सीख मिलती है। हमें धर्म को लेकर किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं रखना चाहिए।

प्रश्न 4. डुमराँव की महत्ता किस कारण से है? (पाठ्य पुस्तक, 2012A, 2015A)
उत्तर- डुमराँव की महत्ता शहनाई के कारण है। प्रसिद्ध शहनाईवादक बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव में हुआ था। शहनाई बजाने के लिए जिस ’रीड’ का प्रयोग होता है, जो एक विशेष प्रकार की घास ’नरकट’ से बनाई जाती है, वह डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है।

प्रश्न 5. बिस्मिल्ला खाँ जब काशी से बाहर प्रदर्शन करते थे तो क्या करते थे? इससे हमें क्या सीख मिलती है?                                              (पाठ्य पुस्तक)
उत्तर- बिस्मिल्ला खाँ जब कभी काशी से बाहर होते तब भी काशी विश्वनाथ को नहीं भूलते। काशी से बाहर रहने पर वे उस दिशा में मुँह करके थोड़ी देर तक शहनाई अवश्य बजाते थे। इससे हमें धार्मिक दृष्टि से उदारता एवं समन्वयता की सीख मिलती है। हमें धर्म को लेकर किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं रखना चाहिए।

प्रश्न 6. पठित पाठ के आधार पर बिस्मिल्ला खाँ के बचपन का वर्णन करें।                                              (Text Book)
उत्तर- कमरुद्दीन यानी उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ चार साल की उम्र में ही नाना की शहनाई को सुनते और शहनाई को ढूँढते थे। उन्हें अपने मामा का सान्निध्य भी बचपन में शहनाईवादन की कौशल विकास में लाभान्वित किया। 14 साल की उम्र में वे बालाजी के मंदिर में रियाज़ करने के क्रम में संगीत साधना करते और आगे चलकर महान कलाकार हुए।

प्रश्न 8. पठित पाठ के आधार पर मुहर्रम पर्व से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव का परिचय दें।                                               (Text Book)
उत्तर- मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ का अत्यधिक जुड़ाव था । मुहर्रम के महीने में वे न तो शहनाई बजाते थे और न ही किसी संगीत-कार्यक्रम में सम्मिलित होते थे। मुहर्रम की आठवीं तारीख को बिस्मिल्ला खाँ खड़े होकर ही शहनाई बजाते थे। वे दालमंडी में फातमान के लगभग आठ किलोमीटर की दूरी तक रोते हुए नौहा बजाते पैदल ही जाते थे।