कक्षा 7 संस्‍कृत पाठ 7 दीपोत्सवः (सप्तमी विभक्ति का प्रयोग) का अर्थ | Deepotsav class 7 sanskrit

इस पोस्‍ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 7 संस्‍कृत के पाठ 7 ‘दीपोत्सवः (सप्तमी विभक्ति का प्रयोग)(Deepotsav class 7 sanskrit)’ के अर्थ को पढ़ेंगे।

Deepotsav class 7 sanskrit

सप्तमः पाठः
दीपोत्सवः
(सप्तमी विभक्ति का प्रयोग )

पाठ-परिचय- प्रस्तुत पाठ ‘दीपोत्सव:’ में प्रसिद्ध उत्सव दीपावली का वर्णन है यह उत्सव कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस उत्सव के अवसर पर लोग अपने-अपने घरों की सफाई करते हैं और रंग-रोगन करते हैं। दीपावली की संध्या को घरों को दीपों से सजाते हैं, पटाखे छोड़ते हैं तथा रात्रि में लक्ष्मी का पूजन करते हैं। लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं तथा शुभकामना प्रकट करते हैं । इस उत्सव के संबंध में मान्यता हैं कि जब भगवान श्रीराम आततायी रावण को मारकर अयोध्या लौटे तो अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। उसी दिन से इस उत्सव की परंपरा शुरू हो गई।

अस्माकं समारोहेषु दीपोत्सवः विशिष्टः । दीपोत्सवः सामान्यतः दीपावली दिवाली वा नाम्ना ज्ञायते । प्रकाशोत्सव : अयं बालानां चित्तानि हरति । गृहेषु, हट्टेषु चत्वरेषु, आपणेषु सर्वत्र दीपानां मालाः शोभन्ते ।

कार्तिकमासस्य अमावस्यायां तिथौ प्रतिवर्षं भारतीया इमम् उत्सवं समायोजयन्ति । शारदीय : अयम् उत्सवः । वर्षायाम् ऋतौ सर्वत्र वर्षाणां प्रभावेण अस्वच्छता, कीटपतंगानां प्रसारश्च भवति । यदा शरद् आयाति तदा जनाः स्वगृहं परिसरं च स्वच्छं कुर्वन्ति । ते गृहाणि सुधया लिम्पन्ति । कपाटगवाक्षादीन् रञ्जयन्ति । इतस्ततः क्षिप्तम् अपद्रव्यम् अपसारयन्ति । सर्वत्र निर्मलता निवसति ।

अर्थ – हमारे उत्सवों में दीपावली प्रमुख है । दीपोत्सव को ही सामान्यतः दीपावली या दिवाली कहते हैं । यह प्रकाशोत्सव बच्चों के मन को आनंद देने वाला होता है। घरों में, द्वारों पर, चौराहों पर, दुकानों में सभी जगह दीपों की माला शोभायमान होती है

भारतीय हर वर्ष कार्तिक महीना की अमावस्या के दिन इस उत्सव का आयोजन करते हैं । यह शरद्कालीन त्योहार है। वर्षा ऋतु में वर्षा के कारण सर्वत्र गंदगी तथा कीट-पतंगों की वृद्धि हो जाती है । जब शरद आता है तब लोग अपने-अपने घरों के आसपास की सफाई करते हैं । वे चूना से घरों की पुताई करते हैं । किवाड़ एवं खिड़कियों को रंगते हैं। इधर-उधर बिखरे गंदे पदार्थों को साफ करते हैं । सर्वत्र स्वच्छता छा जाती है ।

नवं वस्त्रं मिष्टान्नं च लब्ध्वा बाला मुदिताः भ्रमन्ति । ते पटाखाविस्फोटं कृत्वा आनन्दमनुभवन्ति। जनाः परस्परं शुभकामनां प्रकटयन्ति । सर्वत्र बन्धुभावः विराजते ।

रावणवधानन्तरं रामचन्द्रस्य अयोध्यागमने प्रथमः दीपोत्सवः आयोजितः इति जनश्रुतिः । तदा प्रभृति वयम् अस्य आयोजनं कुर्मः । अस्मिन् पर्वणि जना: रात्रौ स्व-स्वगृहं दीपमालिकया अलङ्कुर्वन्ति । धनस्य देवीं लक्ष्मीं पूजयन्ति । निर्धनतां निस्सारयन्ति । इयं रात्रिः सुखरात्रिः इति नाम्ना विख्याता । मिथिलायां बंगप्रदेशे च केचन देवीं कालिकां पूजयन्ति ।

वर्षाकाले वृद्धिम् उपगतानां कीटपतङ्गानां पुरा तैलवर्तिकाभिः विनाशो भवति स्म । तेन पर्यावरणं शुद्धं भवति स्म । अद्य तु वयं मोमवर्तिकानां विद्युद्दीपानां च प्रयोगं कुर्मः । उल्लासप्रकटनाय पटाखाविस्फोटः च भवति । अनेन वातावरणे दूषितः पदार्थः वर्धते । कीटा न नश्यन्ति । वातावरणं च विषयुक्तं भवति । ध्वनिप्रदूषणं चापि वर्धते । अतः सावधानेन भवितव्यम् । स्वरक्षणाय पर्यावरणरक्षणं परमं कर्तव्यम् ।

अर्थ — बच्चे नये वस्त्र तथा मिठाई पाकर अति प्रसन्नता से घूमते हैं । वे पटाखे छोड़कर अपनी खुशी का इजहार करते हैं। लोग आपस में एक-दूसरे को शुभकामना प्रकट करते हैं । सर्वत्र भाईचारे का भाव रहता है।

रावणवध के बाद जब श्रीराम अयोध्या वापस आए तो लोगों ने सर्वप्रथम दीपोत्सव मनाया था, ऐसी मान्यता है । उसके बाद से हम इस उत्सव का आयोजन करते आ रहे हैं। इस उत्सव पर लोग अपने घरों को रात में दीपों से सजाते हैं और धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। निर्धनता ( दरिद्रता) को निकालते हैं । इस रात को सुखरात्रि के नाम से भी जाना जाता है । मिथिला तथा बंगाल में कुछ लोग काली की पूजा करते हैं ।

वर्षा की अवधि में बढ़े हुए कीट-पतंगों का नाश पहले तेल का दीपक जलाकर करते थे। उससे पर्यावरण शुद्ध होता था । इस समय तो मोमबत्ती एवं बिजली के बल्बों का उपयोग करते हैं। और अपनी खुशी का इजहार करने के लिए पटाखे छोड़ते हैं। इससे वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है (लेकिन) कीड़े नहीं मरते हैं । वातावरण प्रदूषित हो रहा है और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है। अतः (इन सबों का) सावधानी से प्रयोग होना चाहिए, क्योंकि आत्म रक्षा के लिए पर्यावरण को स्वच्छ रखना हमारा पुनीत कर्तव्य है ।

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