BSEB Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 3 संख्याज्ञानम्

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तृतीयःपाठः
संख्याज्ञानम्
(संख्या संबंधी जानकारी)

पाठ-परिचय- प्रस्तुत पाठ में छात्रों को संख्या संबंधी जानकारी दी गई हैं। संख्या का ज्ञान सबके लिए आवश्यक हैं। संस्कृत में एक से चार तक की संख्याएँ तीनों लिंगों में अलग-अलग होती हैं। जैसे-पुंलिंग में एकः स्त्रीलिंग में एका तथा नपुंसकलिंग में एकम् होता हैं। लेकिन चार के बाद सभी लिंगो में संख्याएँ एक समान होती हैं।

 नोटः एक से चार तक तीनों लिंगों तथा तीनों वचनों में

   पुंल्लिंग                                               स्त्रीलिंग                                       नपुंसकलिंग

(1) एकः बालकः पठति।              (1) एका बाला पठति।                             (1) एकं पुष्पं विकसति।

(2) द्वौ अश्वौ धावतः।                   (2)द्वे महिले गायतः।                                (2) द्वे चक्रे  भ्रमतः।

(3) त्रयः खगाः कूजन्ति।               (3) तिस्रः बालिकाः क्रीडन्ति।                    (3) त्रीणि पत्रांणि पतन्ति।

(4) खट्वायाः चत्वारः                (4) चतस्रः महिलाः भ्रमन्ति।                      (4) अत्र चत्वारि पुष्पाणि सन्ति।

शब्दार्थः

                 पुंल्लिंग                              स्त्रीलिंग                                  नपुंसकलिंग

अर्थः

(1.) एक लड़का पढ़ता हैं।               (1) एक लड़की पढ़ती हैं।               (1)एक फूल खिलता हैं।

(2) दो घोड़े दौड़ते हैं।                     (2) दो महिलाएँ गाती हैं।                (2) दो पहिए घुमते हैं।

(3) तीन पक्षी कूकते हैं।                  (3) तीन लड़कियाँ  खेलती हैं।         (3) तीन पते गिरते हैं।

(4) खटिया में चार पैर हैं।               (4) चार महिलाए घूमती हैं।              (4) यहाँ चार फूल हैं।

पाँच से बीस तक के वाक्य तीनों लिंगों में :

पन्न्च पाण्डवाः गन्छन्ति। भ्रमरस्य षट् पादाः सन्ति। सप्त तारकाः गगने भान्ति। अत्र अष्टौ फलानि सन्ति। नव पतंगाः। दश मोटरयानानि गच्छन्ति। एकादश फलानि गुच्छे सन्ति। अत्र द्वादश कन्दुकानि सन्ति। तत्र त्रयोदश पुस्तकानि तिष्ठन्ति। चतुर्दश छात्राः नृत्यन्ति। जले पन्न्चदश मीनाः तरन्ति। पुरा भारते षोडश जनपदाः आसन्। इमानि सप्तदश चक्राणि चलन्ति। पुराणानि अष्टादश सन्ति। ऊनविंशतिः भ्रमराः भ्रमन्ति। विंशतिः चटकाः विहरन्ति।

अर्थ- पाँचों पाण्डव जाते हैं। भौंरे के छः पैर होते हैं। आकाश में सात तारे चमकते हैं। यहाँ आठ फल हैं। नौ (नव) फतिंगे हैं। दस मोटर-गाडीयाँ जाती हैं। गुच्छा में ग्यारह फल हैं। यहाँ बारह गेंदे हैं। वहाँ तेरह पुस्तकें रखी हैं। चौदह लडकियाँ नाचती हैं। पानी में पन्द्रह मछलियाँ हैं। पहले भारत में सोलह जनपद थे। ये सतरह/सत्रह चक्के चलते हैं। पुराण अठारह हैं। उन्नीस भौरे चक्कर लगाते हैं। बीस चिडियाँ विहार करती हैं।

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BSEB Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 1 प्रथना

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प्रथमः पाठ
प्रार्थना (आत्म निवेदन)

पाठ परिचय-  प्रस्तुत पाठ ’प्रार्थना’में दो पद्य संकलित हैं। प्रथम पद में बच्चों द्वारा प्रार्थना की गई है कि हे देवों के देव ! तुम्हीं मेरे माता-पिता मित्र, विद्या एवं धन-दौलत सब कुछ हो।तुम्हारे सिवा इस संसार में मेरा कोई नहीं है’क्योंकि केवल तुम ही सत्य हो, संसार असत्य (नाशवान) है। इसलिए तुम हमें सद्ज्ञान से भर दो ताकि हम जीवन-सत्य को ज्ञान, सके।

दूसरे पद्य में पर्वतराज हिमालय, विस्तृत सागर, नदी समूह तथा सुख-साधन सम्पन्न भारत देश को नमस्कार किया गया है कि सदा यह देश इन साधनों से युक्त रहे और हमारे देश के गौरव में चार-चाँद लगाता रहे। बच्चों की यहीं आंकांक्षा है।

1. त्वमेव माता च पिता त्वमेव

त्वमेव बन्‍धूश्‍च  सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव

त्वमेव सर्वं मम देव देव।।

अन्वय-  हे! त्वम् एव मम माता-पिता, बन्‍धु : सखा च (अस्ति )। त्वम् एव मम विद्या द्रविणं च सर्वम् (अस्ति )।

शब्दार्थ- त्वम् =तुम। एव=ही। बन्धु : = भाई। सखा =मित्र। च =और। विद्या =विद्या (ज्ञान)। द्रविणं = धन-दौलत। सर्वम् =सब कुछ। मम =मेरा।

अर्थ-  बच्चे भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हे ईश्वर! तुम्हीं मेरे माता-पिता, भाई-बन्धु, विद्या-बुद्धि तथा धन-दौलत सब कुछ हो। तुम्हीं इस संसार के पालनकर्ता हो। तुम्हारे सिवा इस संसार में कुछ भी स्थायी (सत्य) नहीं हैं। इसलिए तुम हमें उस सच्चे ज्ञान का आशीर्वाद दो, जिसे प्राप्त कर हम अपने जीवन को धन्य बना सकें।

2. नमो नगेन्द्राय हिमालयाय

नमो विशालाय च सागराय।

नदीगणेभ्यः सुखसाधनेभ्यो

देशाय तस्मै मम भारताय।।

अर्थ- पर्वतराज को नमस्कार हैं।हिमालय को नमस्कार है और विस्तृत सागर को नमस्कार हैं। नदी समूह को नमस्कार हैं। धन-दौलत को नमस्कार हैं। इन सम्पन्नताओं के लिए अपने देश भारत को नमस्कार हैं। बच्चे अपना आत्मनिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि हमारे देश भारत में पर्वतराज हिमालय उतर दिशा में प्रहरी के समान विद्यमान है तो तीन दिशाओं में विशाल सागर लहरा रहें हैं। गग्ङा ’यमुना ’ब्रहा्रपुत्र ’कोसी आदि नदियाँ अपने जल से खेतों को सींचती हैं। इस प्रकार यह देश सारे सुख-साधनों से सम्पन्नं विश्व में अन्यतम हैं। इसलिए भारत देश को हम नमस्कार /प्रणाम करते हैं।

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BSEB Class 6th Hindi Solutions Chapter 20 पहेलियाँ

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20. पहेलियाँ (संकलित)

प्रस्तुत पाठ में सात पहेलियाँ संकलित हैं। ये पहेलियाँ बच्चों के मनोरंजन तथा ज्ञान-वृद्धि के लिए दी गई हैं। बच्चे इन पहेलियों के माध्यम से कुछ नई बातें सीखतें हैं तथा अपनी स्मरण-शक्ति बढ़ाते हैं।

                                    अर्थाशय

प्रश्न 1.आग लगे मेरे ही बल से

हर इन्सान के आती काम।

दिन में पौधो मुझे बनाते ,

अब बतलाओ मेरा नाम।।

उत्तर-इसमें ऑक्सीजन के बारे में बताया गया है कि आग ऑक्सीजन का संयोग पाकर जलती है तथा जीव-जन्तु इसे ग्रहण कर जीवित रहते हैं। इसे प्राण वायु भी कहा जाता है। पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्सीजन गैस ग्रहण करते तथा ऑक्सीजन गैस छोड़ते हैं।

प्रश्न 2. एक फूल काले रंग का, सबके सिर सहाय।

तेज धूप में खिला रहे, छाया देख मुरझाये।।

उत्तर-इसमें छाता के विषय में कहा गया है। छाता काले रंग का होता है जिसे धूप तथा पानी में उपयोग किया जाता है। किन्तु घर में या छाया में मोड़कर रख दिया जाता है।

प्रश्न 3. एक सींग की ऐसी गाय

जितना दो उतना ही खाय।

खाते-खाते गाना गाय,

पेट नहीं उसका भर पाय।।

उत्तर– इस पहेली में चक्की के बारे में कहा गया है। इसका हत्था एक सींग को दर्शाता है। चक्की में दाना डाला जाता है तो उससे आटा निकलता रहता है। फलतः कभी भी चक्की भर नहीं पाती है।

प्रश्न 4. एक पहेली मैं कहूँ ,

तू सुन ले मेरे पूत।।

बिन परों वह उड़ गई,

बान्ध गले में सूत।।

उत्तर- इसमें पतंग के विषय में कहा गया है कि पतंग आकाश में उड़ती रहती है जिसमें डोरी (सूत) लगी रहती है। डोरी के सहारे ही लोग इसे आगे-पीछे करते रहते हैं।

प्रश्न 5. नदी हूँ पर पानी नहीं

सड़क हूँ पर गाड़ी नहीं।

भूमि हूँ पर फसल नहीं,

बस्ती (गाँव) हूँ पर घर नहीं।।

उत्तर-इसमें मानचित्र के विषय में कहा गया है। मानचित्र में भूमि, पर्वत, नदी, समुद्र, खेत, गाँव सबके चित्र अंकित होते हैं किंतु वे अपने-आपमें कुछ नहीं है।

प्रश्न 6. ऐसा लिखिए शब्द बनाय,

फूल-फल ,मिठाई बन जाय।।

उत्तर- इसमें गुलाबजामुन मिठाई के विषय में कहा गया है। यह गुलाब फूल तथा जामुन फल दोनों नामों को मिलाकर गुलाबजामुन नाम रखा गया है।

प्रश्न 7. ऊँट की बैठक

हिरण की चाल।

वह कौन-सा जानवर,

जिसके दुम न बाल।।

उत्तर-इसमें मेढ़क के बारे में कहा गया है क्योंकि मेढ़क की पूँछ में बाल नहीं होते।

अभ्यास के प्रश्न एवं उत्तर

पहेलियों के उत्तर:

1.ऑक्सीजन     2. छाता/छतरी      3. चक्की/जाँता       4. पतंग      5.मानचित्र

  1. गुलाबजामुन 7. मेढ़क।

उत्तर-संकेत: छात्र स्वयं पहेलियों का संकलन करेा

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BSEB Class 8th Science Solutions Chapter 18 ध्‍वनियॉं क‍ि तरह तरह की

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प्रश्न 1. सही विकल्प चुनिए :  

(अ) ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है :

(क) ठोस माध्यम तथा निर्वात ।                   (ख) द्रव माध्यम तथा गैस माध्यम

(ग) गैस माध्यम तथा द्रव माध्यम               (घ) ठोस. द्रव तथा गैस माध्यम तानास

(ब) अश्रव्य ध्वनि कहलाते हैं :

(क) 20 Hz से कम आवृत्ति

(ख) 20000 Hz से अधिक आवृत्ति

(ग) 20 Hz से 20000 Hz के बीच की आवृत्ति

(स) किसी कंपित वस्तु को अपनी माध्य स्थिति से दोनों ओर अधिकतम दूरी तक का विस्थापन कहलाता है :

(क) आवृत्ति             (ख) आयाम            (ग) आवर्तकाल           (घ) तारत्व

उत्तर- (अ)→(घ), (ब)-(क), (स)→(ग)।

प्रश्न 2. उचित शब्दों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

(क) ध्वनि किसी वस्तु के ……. द्वारा उत्पन्न होती है।

(ख) प्रति सेकण्ड होने वाले दोलनों की संख्या को ….. कहते हैं।

(ग) कंपित वस्तु एक निश्चित समय अंतराल में अपना एक दोलन पूरा करती है जिसे …..’ कहते हैं।

(घ) अवांछित ध्वनि को ….कहते हैं जिसे …..’ करने का उपाय करना चाहिए।

उत्तर(क) कम्पन, (ख) आवृत्ति, (ग) आवर्तकाल, (घ) शोर, कम।

प्रश्न 3. निम्न वाद्य यंत्रों में उस भाग को पहचानकर लिखिए जो ध्वनि उत्पन्न करने के लिए कंपित होता है।

(क) ढोलक,   (ख) झाल    (ग) बाँसुरी   (घ) एकतारा        (ङ) सितार

उत्तर—(क) चमड़ा, (ख) धातु, (ग) छेद, (घ) तार, (ङ) तार । –

प्रश्न 4. आपके माता-पिता एक आवासीय मकान खरीदना चाहते हैं जिसमें आपको भी रहना है। एक मकान मुख्य सड़क के किनारे तथा दूसरा मकान सड़क से दूर एक बगीचे के पास है, जहाँ इसी सड़क से एक रास्ता जाती है। आप किस मकान को खरीदने का सुझाव देंगे? उत्तर की व्याख्या कीजिए।

उत्तरमैं सड़क से दूर बगीचे के पास वाले मकान खरीदने का सुझाव दूंगा। कारण कि सड़क के किनारे सदैव वाहनों के चलते रहने से हवा में गर्द-गुब्बार की अधिकता रहेगी। वाहनों के इंजन तथा हॉर्मों की शोर से सदैव हल्ला-गुल्ला की स्थिति रहेगी। फलतः यहाँ वायु प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण दोनों की अधिकता रहेगी। बगीचे के पास वाला मकान के पास सदैव शांति रहेगी। वृक्षों की अधिकता से ऑक्सीजन भी भरपूर मिलेगा। इससे हम सदैव निरोग रहेंगे।

प्रश्न 5. आपका मित्र मोबाइल से हमेशा संगीत सुनता रहता है । क्या वह सही कार्य कर रहा है ? व्याख्या कीजिए।

उत्तरमोबाइल से हमेशा संगीत सुनना सही कार्य नहीं है। मोबाइल से निकली आवाज के साथ विद्युत का आघात कर्ण पटल को हानि पहुँचाता है। यहाँ तक कि वह कर्ण कैंसर का भी कारण बन सकता है। इसलिये किसी मोबाइल से सदैव संगीत नहीं

से सुनना चाहिए।

 

परियोजना कार्य : छात्र स्वयं करें

1. प्रसिद्ध भारतीय संगीतज्ञों तथा उनके बजाए जानेवाले वाद्य यंत्रों की सूची बनाइए।

2. यदि आप कोई वाद्य यंत्र बजाते हैं तो उसे बजाकर अपने साथियों को सुनाइए।

3. दो-चार खिलौना टेलीफोन (ठंडा पीनेवाले कागज के गिलास तथा धागा की सहायता से) बनाइए। उसकी सहायता से आपस में अलग-अलग तथा एक साथ बातचीत कीजिए।

4. आंध्र प्रदेश में हैदराबाद के निकट गोलकुण्डा नामक एक भव्य किला है जिसकी | विशेषता है कि गुम्बद के नीचे एक निश्चित बिन्दु पर हाथ से ताली बजाने पर एक किलोमीटर दूर किले के शीर्ष बिन्दु पर स्थित निश्चित स्थान पर उसे सुना जा सकता है। ऐसा क्यों होता है? इस किले की अन्य विशेषताओं की जानकारी – इकट्ठा कीजिए।

 

कुछ महत्त्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर

प्रश्न 1. ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?

उत्तरकिसी वस्तु की अपनी माध्य स्थिति से इधर-उधर गा आगे-पीछे होनेवाला गति के कारण जब कोई वस्तु कंपन करती है तो ध्वनि उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2. पुरुपों, महिलाओं तथा बच्चों के वाक्-तंतुओं की लंबाई कि होती है?

उत्तर पुरुषों के वाक्-तंतुओं की लम्बाई लगभग 20 mm होती है। महिलाओ मे  लगभग 5 mm छोटे अर्थात् 15 mm तथा बच्चों के वाक्-तंतु बहुत छोटे होते हैं। यही कारण है कि पुरुषों, महिलाओं तथा बच्चों की वाक् ध्वनियाँ विभिन्न होती हैं।

प्रश्न 3. क्या ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है?

उत्तर हाँ, ध्वनि संचरण के लिए कोई माध्यम आवश्यक है । ये माध्यम ठोस, तरल या वायु कोई भी हो सकते हैं। 

प्रश्न 4. निर्वात क्या है? क्या ध्वनि निर्वात में संचरण करती है?

उत्तरवायुरहित स्थान निर्वात कहलाता है। निर्वात में ध्वनि संचरण नहीं करती है।

प्रश्न 5. कर्णपटल (eardrum) क्या है? यह सुनने में कैसे सहायक होता है? .

उत्तर- कान के बाहरी भाग की आकृति कीप (फनेल) जैसी होती है। जब ध्वनि इसमें प्रवेश करती है तो यह एक नलिका से गुजरती है, जिसके सिरे पर एक पतली झिल्ली दृढ़ता से तनित होती है। इसे कर्ण पटल (eardrum) कहते हैं। कर्ण पटल एक तनित रबड़ शीट के समान होता है। ध्वनि के कंपन्न कर्ण पटल को कंपित करते हैं। कर्ण पटल कंपनों को अंतःकर्ण (inner ear) तक भेज देता है। वहाँ से संकेतों को मस्तिष्क तक भेज दिया जाता है। इस प्रकार हम सुन पाते हैं।

प्रश्न 6. दोलन गति क्या है?

उत्तरकिसी वस्तु का बार-बार इधर-उधर गति करना दोलन कहलाता है।

प्रश्न 7. आवृत्ति किसे कहते हैं?

उत्तरप्रति सेकंड होनेवाले दोलनों की संख्या को दोलन की आवृति कहते हैं।

प्रश्न 8. आवृति का मात्रक क्या है?

उत्तर- आवृति का मात्रक ह है। इसे संकेत में Hz लिखते हैं। Hz आवृति एक दोलन प्रति सेकंड के बराबर होती है।

प्रश्न 9. तीक्ष्णता और तारत्व क्या हैं?

उत्तर-जब कंपन की आवृति अधिक रहती है तो हम कहते हैं कि ध्वनि तीखी (तीक्षण) है। और जब कंपन की आवृति कम रहती है तब हम कहते हैं कि ध्वनि का तारत्व कम है।

प्रश्न, 10. सुस्वर ध्वनि क्या है?

उत्तर सुस्वर ध्वनि वह है जो कानों को सुखद लगती है। जैसे हारमोनियम आदि की ध्वनि।

प्रश्न 11. शोर प्रदूषण की क्या हानियाँ हैं?

उत्तर- अत्यधिक शोर की उपस्थिति अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है । अनिद्रा, अति तनाव (उच्च रक्तचाप), चिन्ता तथा अन्य बहुत-से स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ी शोर-प्रदूषण से हो सकते हैं। इससे व्यक्ति बहरा तक हो सकता है।

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BSEB Class 8th Science Solutions Chapter 15 जंतुओं में प्रजनन

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प्रश्न 1. सही विकल्प पर (/) निशान लगाइए :

(क) जीवों में निरन्तरता के लिए आवश्यकता है :

(i) पाचन                 (ii) श्वसन               (iii) प्रजनन              (iv) संचरण

(ख) अलैंगिक प्रजनन में भाग लेते हैं :

(i) दो जीव             (ii) तीन जीव           (iii) कोई जीव नहीं     (iv) एक जीव

(ग) लैंगिक प्रजनन में भाग लेते हैं :

(i) दो नर जीव

(ii) एक नर एवं एक मादा अथवा एक उभयलिंगी

(iii) दो मादा जीव

(iv) इनमें से कोई नहीं ।

 (घ) आंतरिक निषेचन होता है :

(i) मादा शरीर के बाहर                                     (ii) नर शरीर के बाहर

(iii) मादा शरीर के अन्दर                                 (iv) नर शरीर के अन्दर

(ङ) मादा जननांग है :  

(i) वृष्ण                  (ii) गर्भाशय             (iii) शिश्न           (iv) शुक्रवाहिनी

उत्तर (क)-(iii), (ख)→(iv), (ग)→(ii), (घ)→(iii), (ङ)→(ii)

प्रश्न 2. सत्य कथन के सामने (/) तथा असत्य कथन के सामने (x) का चिह्न लगाइए:

(i) अमीबा मुकुलन द्वारा प्रजनन करता है।

(ii) मेढक में बाह्य निषेचन होता है।

(iii) अलैंगिक प्रजनन की क्रिया में निषेचन होता है।

(iv) शुक्राणु नर युग्मक है।।

(v) अण्डाशय से शुक्राणु निकलते हैं।

उत्तर-(i) असत्य, (ii) सत्य, (iii) असत्य, (iv) सत्य, (v) असत्य ।

प्रश्न 3. प्रजनन से क्या समझते हैं ?

उत्तर- सजीवों में अपनी जैसी सन्तान उत्पन्न करने के लक्षण पाये जाते हैं । अपना वंशवृद्धि एवं जाति की निरंतरता बनाये रखने के लिये सभी जीव विशेष क्रिया करत हैं, जिसे ‘प्रजनन’ कहा जाता है। प्रजनन से ही संतान की उत्पत्ति होती है।

प्रश्न 4. अलैगिक प्रजनन तथा लैंगिक प्रजनन में विभेद समझाइए ।

उत्तर- अलैगिक प्रजनन में जीव को जोड़े की आवश्यकता नहीं होती। वह व रूप से अकेले अपनी जाति की निरंतरता बनाए रखते हैं। उदाहरण में हम हाइड्र अमीबा को ले सकते हैं। हाइड्रा में मुकुल निकलता है और कालक्रम से मूल से अलग होकर एक नया हाइड्रा बन जाता है। इस प्रक्रम को मुकुलन कहत ‘  द्विखंडन विधि द्वारा अपनी वंशवृद्धि करता है। कुलन कहते हैं। अमीबा लैगिक जनन में नर और मादा की आवश्यकता होती है। पुरुप और स्त्रियों में अलगया जनन अंग होते हैं। एक विशेष प्रक्रिया द्वारा मादा गर्भधारण करती है और बच्चे जन्म देती है। अण्डज के अलावे जितने पिंडज हैं वे इसी प्रक्रिया से प्रजनन करते है। कुछ पादपों में भी नर अंग और मादा अंग होते हैं।

प्रश्न 5. आंतरिक निषेचन तथा बाह्य निषेचन में अंतर बताइए ।

उत्तर- निषेचन की क्रिया जब मादा-शरीर के अंदर होती है तो इस निषेचन को आंतरिक निषेचन कहते हैं। इसके विपरीत निषेचन की क्रिया जब शरीर के बाहर होती है तो इसे आंतरिक निषेचन कहते हैं। मेढ़क में इसी प्रकार का निषेचन होता है। मादा मेढ़क जल में एक बार में सैकड़ों अंडे देती है, जो जेली जैसी परत से बंधे रहते हैं । जिस समय मादा मेढ़क अंडे देती है, उसी समय नर मेढ़क अपने शुक्राणुओं को जल में छिड़क देता है। शुक्राणु तैरते हुए अंडों से जा मिलते हैं और निपेचन हो जाता है।

प्रश्न 6. शिशु के लिंग निर्धारण का क्या अर्थ है ?

उत्तर- शिशु के लिंग निर्धारण का अर्थ है कि यह पहले ही ज्ञात कर लिया जाय कि गर्भ में पनप रहा शिशु लड़का है या लड़की । ऐसी विधि निकल गई है कि इसका पता लगाया जा सके। लेकिन सरकार ने कड़े कानून बना रखे हैं ताकि कोई इस विधि का उपयोग नहीं कर सके।

प्रश्न 7. क्या होगा यदि शुक्राणु को अंडाणु से नहीं मिलने दिया जाय ?

उत्तर- यदि शुक्राणु को अंडाणु से नहीं मिलने दिया जाय तो निपेचन की प्रक्रिया नहीं हो पाएगी। फल होगा कि संतान उत्पन्न नहीं होगी।

प्रश्न 8. क्या शिशु के लिंग निर्धारण के लिये स्त्री उत्तरदायी है ? यदि नहीं तो समाज एवं परिवार के लोगों को आप कैसे समझाइएगा ?

उत्तर नहीं, शिशु के लिंग निर्धारण के लिए स्त्री किसी प्रकार उत्तरदायी नहीं है। वास्तविकता यह है कि लिंग निर्धारण के जिम्मेदार गुणसूत्र हैं । गुणसूत्रों को XY के रूप में जाना जाता है। Y गुणसूत्र वाले शुक्राणु X गुण सूत्र वाले अंडाणु के साथ संयोग होने पर शिशु लड़का होता है। इसके विपरीत यदि दोनों गुणसूत्र XX हो तो शिशु लड़की होती है। लेकिन ईश्वरीय देन यह है कि स्त्रियों को Y गुणसूत्र होते ही नहीं। उनको केवल X गुणसूत्र होते हैं। पुरुष के पास Y और X दोनों पाये जाते हैं। Y गुणसूत्र केवल पुरुष ही निष्कासित कर सकता है। अतः स्पष्ट है कि शिशु लड़का होगा या लड़की, इसका जिम्मेदार केवल पुरुष ही है।

परियोजना कार्य : छात्र स्वयं करें

1. अमीबा तथा हाइड्रा के प्रजनन संबंधी स्लाइड का सूक्ष्मदर्शी से अवलोकन कीजिए जो दिखाई दे उसका स्वच्छ चित्र बनाइए।

2. जुड़वाँ बच्चे कैसे पैदा होते हैं ? आसपास कोई जुड़वाँ बच्चे ढूँढ़िए और उनके व्यवहारों का अध्ययन कीजिए।

3. बुझो : (पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 217 का चित्र 15.7 देखें ।) दिए गए चित्र में अमीबा द्वारा द्विखंडन विधि से प्रजनन प्रक्रम को दर्शाया गया है। प्रक्रम के अन्त में अमीबों की कुल संख्या बताइए। 

कुछ महत्त्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर प्रश्न

प्रश्न 1. शुक्राणु किसे कहते हैं?

उत्तर- नर जनन अंगों में एक जोड़ा वृषण, दो शुक्राणु नलिका तथा एक शिन (लिंग) होते है । वृषण नर युग्मक उत्पन्न करते है जिन्हें शुक्राणु कहते हैं।

प्रश्न 2. लैगिंक जनन क्या है?

उत्तर- ऐसा जनन जिसमें नर तथा मादा युग्मक का संलयन होता है, लैगिंक जनन कहलाता है। लैगिक जनन करनेवाले जंतुओं में नर और मादा में जननांग होते हैं।

प्रश्न 3. क्या शुक्राणु एकल कोशिका जैसे प्रतीत होते हैं?

उत्तरहाँ, शुक्राणु एकल कोशिका जैसे प्रतीत होते हैं। प्रश्न

प्रश्न 4. परखनली शिशु किसे कहते हैं?

उत्तर-कुछ स्त्रियों की अंडवाहिनी अवरुद्ध हो जाती है। ऐसी स्त्रियाँ शिशु उत्पन्न . करने में असमर्थ होती हैं, क्योंकि निपेचन के लिए शुक्राणु-मार्ग अवरुद्ध होने के कारण ‘ अंडाणु तक नहीं पहुँच पाते । ऐसी स्थिति में डॉक्टर ताजा अंडाणु एवं शुक्राणु एकत्र करक परखनली में कुछ घंटों के लिए साथ रखते हैं, जिससे IVF अथवा इन विटो निषेचन (शरार से बाहर कृत्रिम निषेचन) हो सके । निपेचन के बाद युग्मनज को लगभग एक सप्ताह तक विकासत किया जाता है. जिसके पश्चात उसे माता के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है । शिशु माता के गर्भाशय में पर्ण विकसित होता है. तथा शिशु का जन्म सामान का तरह ही होता है। इस तकनीक द्वारा जन्मे शिश को परखनली शिशु काबनली शिशु कहते है।

प्रश्न 5. भ्रूण किसे कहते हैं?

उत्तर निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज बनता है जो विकसित होकर भ्रूण में परिवर्धित होता है। युग्मनज लगातार विभाजित होकर कोशिकाओं के गोले में बदल जाता है। तत्पश्चात् कोशिकाएँ समूहीकृत होने लगती हैं तथा विभिन्न ऊतको एवं अंगों में परिवर्तित हो जाती है। इसी विकसित होती हुई संरचना को भ्रूण कहते हैं।

प्रश्न 6. अमीबा की आकृति को आप किस प्रकार परिभापित करेंगे?

उत्तर- अमीबा की आकृति अनियमित होती है। यह अपनी आकृति बदलता रहता है। इसके मुख शरीर से बाहर की ओर, परिवर्ती लम्बाई में प्रबर्व उभरे हुए दिखाई देते हैं, जिन्हें पादाभ कहते हैं।

प्रश्न 7. तालाब के जल में कौन-कौन-से जंतु पाए जाते हैं?

उत्तर- रॉस तालाब के जल में जाक, चेरा या कंचुआ, मछली, मेढ़क, घोंघा आदि अनेक प्रकार के एककोशिक अथवा बहुकोशिक जीव पाए जाते हैं। ।

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Bihar Board Class 7th Sanskrit Solutions अमृता भाग 2

BSEB Class 7th Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 | Bihar Board Class 7th Sanskrit Solutions अमृता भाग 2

Amrita Sanskrit Book Bihar Class 7 Solutions

Chapter 1 वन्दना
Chapter 2 कूर्मशशककथा
Chapter 3 ऋतुपरिचयः

Chapter 4 स्वतन्त्रता-दिवसः
Chapter 5 प्रहेलिकाः

Chapter 6 संख्याज्ञानम्
Chapter 7 दीपोत्सवः
Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्
Chapter 9 सुभाषितानि
Chapter 10 दिनचर्या
Chapter 11 डॉ. भीमराव अम्बेदकरः
Chapter 12 अरण्यम्
Chapter 13 परिहास-कथा
Chapter 14 बोधगया

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solutions किसलय भाग 2

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Kislay Bhag 2 Hindi Book Bihar Class 7 Solutions

BSEB Bihar Board Class 10 Maths Solutions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल Ex 12.1

BSEB Bihar Board Class 10 Maths Solutions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल Ex 12.1

Bihar Board Class 10 Maths वृतों से संबंधित क्षेत्रफल Ex 12.1

(जब तक अन्यथा न कहा जाए, π = 22/7 का प्रयोग कीजिए)

प्रश्न 1. दो वृत्तों की त्रिज्याएँ क्रमशः 19 cm और 9 cm हैं। उस वृत्त की त्रिज्या ज्ञात कीजिए जिसकी परिधि इन दोनों वृत्तों की परिधियों के योग के बराबर है।

प्रश्न 2. दो वृत्तों की त्रिज्याएँ क्रमशः 8 cm और 6 cm हैं। उस वृत्त की त्रिज्या ज्ञात कीजिए जिसका क्षेत्रफल इन दोनों वृत्तों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर है।

प्रश्न 3. दी गई आकृति एक तीरंदाजी लक्ष्य को दर्शाती है, जिसमें केन्द्र से बाहर की ओर पाँच क्षेत्र GOLD, RED, BLUE, BLACK और WHITE चिह्नित हैं, जिनसे अंक अर्जित किए जा सकते हैं। GOLD अंक वाले क्षेत्र GOLD का व्यास 21 cm है तथा प्रत्येक अन्य पट्टी 10.5 cm चौड़ी है। अंक प्राप्त कराने वाले इन पाँचों क्षेत्रों में से प्रत्येक का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।

प्रश्न 4.
किसी कार के प्रत्येक पहिए का व्यास 80 cm है। यदि यह कार 66 km प्रति घण्टे की चाल से चल रही है तो 10 मिनट में प्रत्येक पहिया कितने चक्कर लगाता है?

प्रश्न 5.  निम्नलिखित में सही उत्तर चुनिए तथा अपने उत्तर का औचित्य दीजिए-
यदि एक वृत्त का परिमाप और क्षेत्रफल संख्यात्मक रूप से बराबर है तो उस वृत्त की त्रिज्या है-
(A) 2 मात्रक
(B) π मात्रक
(C) 4 मात्रक
(D) 7 मात्रक

BSEB Bihar Board Class 10 Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज Ex 6.3

BSEB Bihar Board Class 10 Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज Ex 6.3

Bihar Board Class 10 Maths त्रिभुज Ex 6.3

प्रश्न 1. बताइए कि आकृति में दिए त्रिभुजों के युग्मों में से कौन-कौन से युग्म समरूप हैं। उस समरूपता कसौटी को लिखिए जिसका प्रयोग आपने उत्तर देने में किया है तथा साथ ही समरूप त्रिभुजों को सांकेतिक रूप में व्यक्त कीजिए।

प्रश्न 2. आकृति में, ∆ODC ~ ∆OBA, ∠BOC = 125° और ∠CDO = 70° है। ∠DOC, ∠DCO और ∠OAB ज्ञात कीजिए।

प्रश्न 3. समलम्ब ABCD जिसमें AB || DC है, के विकर्ण AC और BD परस्पर O पर प्रतिच्छेद करते हैं। दो त्रिभुजों की समरूपता कसौटी का प्रयोग करते हुए, दर्शाइए कि OA/OC=OB/OD है।

प्रश्न 4. दी गई आकृति में, QR/QS=QT/PR तथा ∠1 = ∠2 है। दर्शाइए कि ∆PQS ~ ∆TQR है।

प्रश्न 5. ∆PQR की भुजाओं PR और QR पर क्रमशः बिन्दु S और T इस प्रकार स्थित हैं कि ∠P = ∠RTS है। दर्शाइए कि ∆RPQ ~ ∆RTS है।

प्रश्न 6. दी गई आकृति में, यदि ∆ABE ≅ ∆ACD है तो दर्शाइए कि ∆ADE ~ ∆ABC है।

प्रश्न 7. दी गई आकृति में, ∆ABC के शीर्ष लम्ब AD और CE परस्पर बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करते हैं। दर्शाइए कि-
(i) ∆AEP ~ ∆CDP
(ii) ∆ABD ~ ∆CBE
(iii) ∆AEP ~ ∆ADB
(iv) ∆PDC ~ ∆BEC

प्रश्न 8.  समान्तर चतुर्भुज ABCD की बढ़ाई गई भुजा AD पर स्थित E एक बिन्दु है तथा BE भुजा CD को F पर प्रतिच्छेद करती है। दर्शाइए कि ∆ABE ~ ∆CFB हैं।

प्रश्न 9. दी गई आकृति में, ABC और AMPदो समकोण त्रिभुज हैं, जिनके कोण B और M समकोण हैं। सिद्ध कीजिए कि-
(i) ∆ABC ~ ∆AMP
(ii) CA/PA=BC/MP

प्रश्न 10. CD और GH क्रमशः ∠ACB और ∠EGF के ऐसे समद्विभाजक हैं कि बिन्दु D औरत क्रमशः ∆ABC और ∆FEG की भुजाओं AB और FE पर स्थित हैं। यदि ∆ABC ~ ∆FEG हो तो दर्शाइए कि-
(i) CD/GH=AC/FG
(ii) ∆DCB ~ ∆HGE
(iii) ∆DCA ~ ∆HGF

प्रश्न 11. दी गई आकृति में, AB = AC वाले, एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC की बढ़ाई गई भुजा CB पर स्थित E एक बिन्दु है। यदि AD ⊥ BC और EF ⊥ AC है तो सिद्ध कीजिए कि ∆ABD ~ ∆ECF है।

प्रश्न 12. एक त्रिभुज ABC की भुजाएँ AB और BC तथा माध्यिका AD एक अन्य त्रिभुज PQR की क्रमशः भुजाओं PQ और QR तथा माध्यिका PM के समानुपाती हैं। दर्शाइए कि ∆ABC ~ ∆PQR है।

प्रश्न 13. किसी त्रिभुज ABC की भुजा BC पर एक बिन्दु D इस प्रकार स्थित है कि ∠ADC = ∠BAC है। दर्शाइए कि CA2 = CB . CD

प्रश्न 14. एक त्रिभुज ABC की भुजा AB और AC तथा माध्यिका AD, एक अन्य त्रिभुज PQR की भुजाओं PQ और PR तथा माध्यिका PM के समानुपाती हैं। दर्शाइए कि ∆ABC ~ ∆PQR है।

प्रश्न 16. AD और PM त्रिभुजों ABC और PQR की क्रमशः माध्यिकाएँ हैं, जबकि ∆ABC ~ ∆PQR है। सिद्ध कीजिए कि ABPQ=ADPM है।

10. Nayan chhagh class 9th sanskrit | कक्षा 9 नायं छागः (प्रहसनम्)

इस पोस्‍ट में हमलोग बिहार बोर्ड कक्षा 9 संस्‍कृत पीयुषम् द्रुतपाठाय भाग दो के पाठ दस‘नायं छागः (प्रहसनम्)’ (Nayan chhagh class 9th sanskrit)’ के अर्थ को पढ़ेंगे।

10. नायं छागः (प्रहसनम्)

पाठ-परिचय- प्रस्तुत पाठ ‘नायं छाग:’ एक मनोरंजक प्रहसन् है। इसके माध्यम से मनोरंजन के महत्त्व को प्रतिपादित किया गया है। मानव जीवन समस्याओं का जाल है। समस्याओं से घिरे मानव को मानसिक तनाव से कुछ क्षण मुक्ति पाने के लिए किसी मनोरंजन की आवश्यकता महसूस होती है। यह प्रहसन उसी की बानगी है।

(ततः प्रविशति स्कन्धे छागं वहन् देवदत्तः)

देवदत्तः अहो ! स्वस्थः शोभनोऽयं छागः । ग्रामं नीत्वा सपरिवारोऽहं दिनत्रयं यावद् एतस्य
सुललितं मांसं भक्षयामि । (इत्येकतो निष्क्रान्तः) (तत: एकस्मिन् कोणे स्थितास्त्रयो
धूर्ता एतद् दृष्ट्वा परस्परं मन्त्रयन्ति ।)
प्रथम् (मन्दस्वरेण) मित्र । चिरात् छागमांसं न प्राप्तम् । अद्यायं वराको दृश्यते ।
एतस्माच्छागग्रहणाय कश्चिद् उपायः करणीयः ।
द्वितीयः – उपाय: परमः सरलोऽस्ति ।
तृतीयः – कीदृशः? कीदृशः ?
द्वितीयः (उभयो :कर्णे किमपि कथयति ।)
प्रथमः  – (विहसन्) युवाम् अग्रे वेगेन गच्छतम् । अहमत्र तेन सह आलपामि ।

अर्थ- (तब कंधे पर बकरे ले जाता हुआ देवदत्त प्रवेश करता है। Nayan chhagh class 9th sanskrit
देवदत्त-अरे । यह बकरा अच्छा तथा स्वस्थ है। गाँव ले जाकर परिवार के साथ तीन दिनों तक इसके स्वादिष्ट मांस को खाऊँगा । (ऐसा कहकर निकल गया) (तभी एक कोने में स्थित. तीनों धूर्त इसे देखकर आपस में विचार करते हैं।)
पहला –(धीमे स्वर में) । मित्र, बहुत दिनों से बकरे का मांस नहीं खाया हूँ । आज यह बेचारा दिखाई पड़ा है। इसलिए बकरे प्राप्त करने का कोई उपाय करना चाहिए।
दूसरा –उपाय अति आसान है। तीसरा-कैसे? कैसे?
दूसरा – (दोनों के कानों में कुछ कहता है।)
पहला – (हँसते हुए) तुम दोनों तेजी से आगे जाओ। मैं इससे बात करता हूँ।

(द्वितीयतृतीयौ गच्छतः)
(ततः प्रविशति स्कन्धे छागं वहन् देवदत्तः)
देवदत्तः (छागं प्रति) अयि भोः ! अधुना त्वं मम स्कन्धे तिष्ठसि, श्वः मम उदरे
स्थास्यसि ।
प्रथमः – भो ब्राह्मण ! धिक् त्वाम् । कथं कुक्कुरमेनं स्कन्धे वहसि ?
देवदत्तः – (तं साशंकं पश्यन्) नायं कुक्कुरः, छागोऽयं छागः ।
प्रथमः – (विहसन्) पश्यन्तु भोः ! अयं मूर्खः कुक्कुरमेव छागं मनुते ।
देवदत्तः – त्वमेव मूर्खाऽसि । अयं में छागोऽस्ति ।
प्रथमः – गच्छ मूर्ख ! कुक्कुरमेव खादिष्यसि, चाण्डालो भविष्यसि । सावधानेन पश्य,
कुक्कुरोऽयमिति ।
देवदत्तः- गच्छ, गच्छ । मां वञ्चयसि । नाहं तव शृणोमि ।
(उभौ निष्क्रान्तौ)
(ततः प्रविशति द्वितीयः)
द्वितीयः – (आगच्छन्तं देवदत्तं विलोक्य साश्चर्यं विलोकयन्) पश्चन्तु भोः ! अयं ब्राह्मणः
कुक्कुरं वहति । भोः? निक्षिप एनम् । धिक् त्वाम् ।
देवदत्तः – नायं कुक्कुरः, छागोऽयम् ।
द्वितीयः – तव दृष्टिदोषोऽयम् चत् कुक्करं छागं भणसि ।
देवदत्तः – (स्वगतम्) अहो पूर्वमाप तनक्तम्, अधुना पुनरप्ययं कथयति । पश्यामि तावत् ।
(छागं स्कन्वादत्रता निपुणं निरीक्ष्य) नहि नहि । नायं कुक्कुरः, छाग एवायम् ।
द्वितीयः – धिग् विक । परित्यज कुक्कुरम् ।
देवदत्तः – अरे मूर्ख ! के प्रलपसि ? नायं कुक्कुरः छागोऽयं मे छागः । छागं स्कन्धे नीत्वा
अग्रे सरनि ।
द्वितीयः – गच्छ, गच्छ । कुक्कुरं खादिष्यसि । Nayan chhagh class 9th sanskrit

अर्थ- (दूसरा-तीसरा दोनों जाता है) (तब देवदत्त कंधे पर बकरे को लेकर प्रवेश करता है।)
देवदत्त – (बकरे के प्रति) अरे बकरे! इस समय तुम मेरे कंधे पर हो, कल मेरे पेट में रहोगे।..
पहला – हे ब्राह्मण ! तुमको धिक्कार है। क्यों इस कुत्ते को कंधे पर ढो रहे हो ?
देवदत्त – (संदेहपूर्वक उसे देखते हुए) यह कुत्ता नहीं है, यह बकरा है।
पहला – (हँसते हुए) अरे देखो! यह मूर्ख कुत्ते को ही बकरा मान रहा है।
देवदत्त – तुम ही मूर्ख हो। यह मेरा बकरा है।
पहला – जाओ मूर्ख । कुत्ता ही खाओगे। चाण्डाल होओगे। सावधानीपूर्वक देखा। यह कुत्ता ही है।
देवदत्त – जाओ, जाओ । मुझे ठग रहे हो । मैं तुम्हारी बात नहीं सुनूँगा । (दोनों जाते हैं)
(इसके बाद दूसरा प्रवेश करता है)
दूसरा –(देवदत्त को आते हुए देखकर आश्चर्य के साथ देखते हुए) अरे देखो। यह ब्राह्मण कुत्ते को ले जा रहा है। अरे! इसे फेंक दो। तुमको धिक्कार है।
देवदत्त – यह कुत्ता नहीं, बकरा है।
दूसरा – यह तुम्हारा दृष्टिदोष है कि कुत्ते को बकरा कहते हो।
देवदत्त (अपने-आप) अरे पहले भी उसने कहा था, इस समय फिर यह कहता है। तब मैं देखता हूँ। (बकरे को कंध से उतारकर अच्छी तरह देखता है) नहीं, नहीं। यह कुत्ता नहीं, बकरा ही है।
दूसरा – धिक्कार है, धिक्कार है। त्याग करो कुत्ते को।
देवदत्त – अरे मूर्ख! क्या बकते हो। यह कुत्ता नहीं, मेरा बकरा है। बकरे को कंधे पर लेकर आगे बढ़ता है।
दूसरा – जाओ, जाओ। कुत्ते को खाओगे।

(इति निष्कान्तः)
(देवदत्तः किञ्चिद् दूरं गच्छति । ततः प्रविशति तृतीयः)
तृतीयः (उच्चैर्विहसन्) पश्यन्तु भोः । ब्राह्मणोऽयं कुक्कुरं नयति ।
देवदत्तः – नायं कुक्कुरः, छागोऽयम् ।
तृतीयः अरे मूर्ख ! केनापि वञ्चितोऽसि । कुक्कुरोऽयं, परित्यज एनम् । तव पितुः शपथं
कृत्वा कथयामि, नायं छागः, कुक्कुरोऽयम् ।
देवदतः – (विस्मितः सन् स्वगतम्) हन्त ! सर्वे कथयन्ति कुक्कुरोऽयमिति । सत्यम्, ममैव
मतिभ्रमोऽस्ति ।
तृतीयः – भो ब्राह्मण ! किं विचारयसि ? शीघ्रं परित्यज एनम् । नद्यां स्नात्वा गंगाजलेन शरीरं
शोधय ।
देवदतः – सत्यम् भ्रातः । मम मतिभ्रमो जातः परित्यजामि एनम् । (इति छागं परित्यज्य
घृणापूर्वकं निष्क्रान्तः ।)
(ततः प्रथमः द्वितीय श्च प्रविशतः)
तृतीयः – (सानन्दं छागं गृहीत्वा) सुदिनमद्य । शोभनोऽयं छागो लब्धः ।
प्रथमः – अस्माकं मन्त्रणा सफला जाता ।
द्वितीयः – तत्र कः सन्देह :, क्षिप्रं निस्सरामः ।
(इति निष्क्रान्ता:सर्वे)

अर्थ- (इस प्रकार निकल जाता है) (देवदत्त कुछ दूर जाता है तब तीसरा प्रवेश करता है)
तीसरा – (जोर से हँसते हुए) अरे देखो। यह ब्राह्मण कुत्ते को ले जा रहा है
देवदत्त – यह कुत्ता नहीं, बकरा है।
तीसरा – रे मूर्ख । किसने तुम्हें ठग लिया है। यह कुत्ता है, इसका त्याग करो तुम्हारे पिता की कसम कहता हूँ, यह बकरा नहीं हैं, यह कुत्ता है।
देवदत्त – (आश्चर्यचकित-सा मन-ही-मन) मारा गया। सभी इसे कुत्ता कहते हैं। वास्तव में, मुझे ही भ्रम हो गया है।
तीसरा – हे ब्राह्मण! क्या सोचते हो? जल्दी इसे छोड़ दो। नदी में स्नान करके गङ्गाजल से शरीर को शुद्ध करो।
देवदत्त – ठीक है भाई! मुझे मतिभ्रम हो गया, इसे छोड़ता हूँ। (इस प्रकार बकरे को छोड़कर घृणापूर्वक चला जाता है)
(तब पहला और दूसरा प्रवेश करता है।)
तीसरा- (खुशीपूर्वक बकरे को लेकर) आज अच्छा दिन है। यह सुन्दर बकर प्राप्त हुआ।
पहला – हमारी योजना सफल रही।
दूसरे – इसमें क्या संदेह हे, जल्दी (हम) चलें।
(इस प्रकार सभी चले जाते हैं)

Nayan chhagh class 9th sanskrit

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