जर्मनी का एकीकरण सम्‍पूर्ण जानकारी

जर्मनी का एकीकरण

इटली और जर्मनी का एकीकरण साथ-साथ सम्पन्न हुआ।

आधुनिक युग में जर्मनी पुरी तरह से विखंडित राज्य था, जिसमें 300 छोटे-बड़े राज्य थे।

जर्मनी में राजनितिक, सामाजिक तथा धार्मिक विषमताएँ थी।

जर्मन एकीकरण की पृष्ठभूमि निर्माण का श्रेय नेपोलियन बोनापार्ट को दिया जाता है क्योंकि 1806 ई० में जर्मन प्रदेशों को जीत कर राईन राज्य संघ का निर्माण किया था। यहाँ से जर्मन राष्ट्रवाद की भावना धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी।

उत्तर जर्मन राज्यों में जहाँ प्रोटेस्टेंट मतावलम्बियों की संख्या ज्यादा थी, वहाँ प्रशा सबसे शक्तिशाली राज्य था एवं अपना प्रभाव बनाए हुए था।

दूसरी तरफ दक्षिण जर्मनी के कैथोलिक बहुल राज्यों की प्रतिनिधि सभा-’डायट’ जिन्दा थी, जहाँ सभी मिलते थे। परन्तु उनमें जर्मन राष्ट्रवाद की भावना का अभाव था, जिसके कारण एकीकरण का मुद्दा उनके समक्ष नहीं था।

इसी दौरान जर्मनी में बुद्धिजीवियों, किसानों तथा कलाकारों, जैसे-हीगेल काण्ट, हम्बोल्ट, अन्डर्ट, जैकब ग्रीम आदि ने जर्मन राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

जर्मनी में राष्ट्रीय आन्दोलन में शिक्षण संस्थानों एवं विद्यार्थियों का भी योगदान था। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने जर्मनी एकीकरण के उद्देश्य से ’ब्रूशेन शैफ्ट’ नामक सभा स्थापित की। वाइमर राज्य का येना विश्वविद्यालय राष्ट्रीय आन्दोलन का केन्द्र था।

1834 में जन व्यापारियों ने आर्थिक व्यापारिक समानता के लिए प्रशा के नेतृत्व में जालवेरिन नामक आर्थिक संघ बनाया, जो जर्मन राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

फ्रांस की 1830 की क्रांति ने जर्मन राष्ट्रवादी भावनाओं को कुछ हवा जरूर दी।

1848 की फ्रांसीसी क्रांति ने जर्मन राष्ट्रवाद को एक बार फिर भड़का दिया। दूसरी तरफ इस क्राति ने मेटरनिख के युग का अंत भी कर दिया।

इसी समय जर्मन राष्ट्रवादियों ने मार्च 1848 में पुराने संसद की सभा को फ्रैंकफर्ट में बलाया।

जहाँ यह निर्णय लिया गया कि प्रशा का शासक फ्रेडरिक विलियम जर्मन राष्ट्र का नेतृत्व करेगा और उसी के अधीन समस्त जर्मन राज्यों को एकीकृत किया जायेगा।

फ्रेडरिक, जो एक निरंकुश एवं रूढ़िवादी विचार का शासक था, ने उस व्यवस्था को मानने से इंकार कर दिया।

प्रशा भी मानता था कि जर्मनी का एकीकरण उसी के नेतृत्व में हो सकता है।

इसलिए उसने अपनी सैन्य शक्ति बढ़ानी शुरू कर दी।

इसी बीच फ्रेडरिक विलियम का देहान्त हो गया और उसका भाई विलियम प्रशा का शासक बना।

विलियम राष्ट्रवादी विचारों का पोषक था।

विलियम ने एकीकरण के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर महान कूटनितिज्ञ बिस्मार्क को अपना चांसलर नियुक्त किया।

जर्मनी का एकीकरण में बिस्मार्क

बिस्मार्क एक सफल कुटनितिज्ञ था, वह हीगेल के विचारों से प्रभावित था।

वह जर्मन एकीकरण के लिए सैन्य शक्ति के महत्व को समझता था।

अतः इसके लिए उसने ‘रक्त और लौह की नीति‘ का अवलम्बन किया।

बिस्मार्क ने अपनी नीतियों से प्रशा का सुदृढ़ीकरण किया और इस कारण प्रशा, ऑस्ट्रिया से किसी भी मायने में कम नहीं रहा।

बिस्मार्क ने ऑस्ट्रिया के साथ मिलकर 1864 ई० में शेल्सविग और होल्सटिन राज्यों के मुद्दे को लेकर डेनमार्क पर आक्रमण कर दिया। क्योंकि उन पर डेनमार्क का नियंत्रण था।

जीत के बाद शेल्सविग प्रशा के अधीन हो गया और होल्सटिन ऑस्ट्रिया को प्राप्त हुआ। चूँकि इन दोनों राज्यों में जर्मनों की संख्या अधिक थी

अतः प्रशा ने जर्मन राष्ट्रवादी भावनाओं को भड़का कर विद्रोह फैला दिया, जिसे कुचलने के लिए ऑस्ट्रिया की सेना को प्रशा के क्षेत्र को पार करते हुए जाना था और प्रशा ने ऑस्ट्रिया को ऐसा करने से रोक दिया।

बिस्मार्क ऑस्ट्रिया को आक्रमणकारी साबित करना चाहता था अतः पूर्व में ही उसने फ्रांस से समझौता कर लिया था कि ऑस्ट्रिया-प्रशा युद्ध में फ्रांस तटस्थ रहे। इसके लिए उसने फ्रांस को कुछ क्षेत्र भी देने का वादा किया था।

बिस्मार्क ने इटली के शासक विक्टर इमैनुएल से भी संधि कर ली जिसके अनुसार ऑस्ट्रिया-प्रशा युद्ध में इटली को ऑस्ट्रियाई क्षेत्रों पर आक्रमण करना था। अंततः अपने अपमान से क्षुब्ध ऑस्ट्रिया ने 1866 ई० में प्रशा के खिलाफ सेडोवा में युद्ध की घोषणा कर दी।

ऑस्ट्रिया दोनों तरफ से युद्ध में फंस कर बुरी तरह पराजित हो गया, इस तरह ऑस्ट्रिया का जर्मन क्षेत्रों पर से प्रभाव समाप्त हो गया और इस तरह जर्मन एकीकरण का दो तिहाई कार्य पुरा हुआ।

शेष जर्मनी के एकीकरण के लिए फ्रांस के साथ युद्ध करना आवश्यक था। क्योंकि जर्मनी क दक्षिणी रियासतों के मामले में फ्रांस हस्तक्षेप कर सकता था। इसी समय स्पेन की राजगद्दी का मामला उभर गया, जिस पर प्रशा के राजकुमार की स्वाभाविक दावेदारी थी। परन्तु फ्रांस ने इस दावदारी का खुलकर विरोध किया और प्रशा से इस संदर्भ में एक लिखित वादा मांगा। बिस्मार्क न इस बात को तोड़-मरोड़ कर प्रेस में जारी कर दिया। फलस्वरूप जर्मन राष्ट्रवादियों ने इसका खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया।

स्पेन की उतराधिकार को लेकर 19 जून 1870 को फ्रांस के शासक नेपोलियन ने प्रशा के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और सेडॉन की लड़ाई में फ्रांसीसियों की जबदस्त हार हुई। तदुपरांत 10 मई 1871 को फ्रैंकफर्ट की संधि द्वारा दोनों राष्ट्रों के बीच शांति स्थापित हुई। इस प्रकार सेडॉन के युद्ध में ही एक महाशक्ति के पतन पर दूसरी महाशक्ति जर्मनी का उदय हुआ। अंततोगत्वा जर्मनी 1871 तक एक एकीकृत राष्ट्र के रूप में यूरोप के राजनैतिक मानचित्र में स्थान पाया।

जर्मन राष्ट्रवाद का प्रभाव

जर्मन राष्ट्रवाद ने केवल जर्मनी में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण यूरोप के साथ-साथ हंगरी, बोहेमिया तथा यूनान में स्वतंत्रता आन्दोलन शुरू हो गये।

इसी के प्रभाव ने ओटोमन साम्राज्य के पतन की कहानी को अंतिम रूप दिया। बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवाद के प्रसार ने स्लाव जाति को संगठित कर सर्बिया को जन्म दिया।

इटली का एकीकरण पर नोट्स

इटली का एकीकरण

इटली के एक राष्ट्र के रूप में स्थापित होने में भौगोलिक समस्या के अलावे कई अन्य समस्याएँ थीं। जैसे- इटली में ऑस्ट्रीया और फ्रांस जैसे विदेशी राष्ट्रों का हस्तक्षेप था।

इसलिए एकीकरण में इनका विरोध अवश्यम्भावी था।

पोप की इच्छा थी कि इटली का एकीकरण स्वयं उसके नेतृत्व में धार्मिक दृष्टिकोण से हो ना कि शासकों के नेनृत्व में।

इसके अलावा आर्थिक और प्रशासनिक विसंगतियाँ भी मौजूद थीं।

नेपोलियन ने इसे तीन गणराज्यों में गठित किया जैसे- सीसपाइन, गणराज्य, लीगुलीयन तथा ट्रांसपेडेन।

नेपोलियन ने यातायात व्यवस्था को भी चुस्त-दुरूस्त किया तथा सम्पूर्ण क्षेत्र को एक शासन के अधीन लाया।

इटली के एक राष्ट्र के रूप में स्थापित होने में भौगोलिक समस्या के अलावे कई अन्य समस्याएँ थीं। जैसे- इटली में ऑस्ट्रीया और फ्रांस जैसे विदेशी राष्ट्रों का हस्तक्षेप था।

इसलिए एकीकरण में इनका विरोध अवश्यम्भावी था।

पोप की इच्छा थी कि इटली का एकीकरण स्वयं उसके नेतृत्व में धार्मिक दृष्टिकोण से हो ना कि शासकों के नेनृत्व में।

इसके अलावा आर्थिक और प्रशासनिक विसंगतियाँ भी मौजूद थीं।

नेपोलियन ने इसे तीन गणराज्यों में गठित किया जैसे- सीसपाइन, गणराज्य, लीगुलीयन तथा ट्रांसपेडेन।

नेपोलियन ने यातायात व्यवस्था को भी चुस्त-दुरूस्त किया तथा सम्पूर्ण क्षेत्र को एक शासन के अधीन लाया।

नेपोलियन के पतन ( 1814 ) के पश्चात वियना काँग्रेस ( 1815 ) द्वारा इटली को पुराने रूप में लाने के उद्देश्य से इटलीके दो राज्यों पिडमाउण्ट और सार्डिनिया का एकीकरण कर दिया।

इस प्रकार इटली के एकीकरण की दिशा तय होने लगी।

इटली में 1820 ई० से ही कुछ राज्यों में संवैधानिक सुधारों के लिए नागरिक आंदोलन होने लगे।

एक गुप्त दल ‘कार्ब्रोनारी‘ का गठन राष्ट्रवादियों द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य छापामार युद्ध के द्वारा राजतंत्र को नष्ट कर गणराज्य की स्िापना करना था।

प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता जोसेफ मेजिनी का संबंध भी इसी दल से था।

1830 की क्रांति के प्रभाव से इटली भी अछूता नहीं रह सका और यहाँ भी नागरिक आन्दोलन शुरू हो गए।

मेजिनी ने भी नागरिक आन्दोलनों का उपयोग करते हुए उŸारी और मध्य इटली में एकीकृत गणराज्य स्थापित करने का प्रयास किया।

लेकिन ऑस्ट्रीया के चांसलर मेटरनिख द्वारा इन राष्ट्रवादी नागरिक आन्दोलनों को दबा दिया गया और मेजिनी को इटली से पलायन करना पड़ा।

इटली के एकीकरण में मेजिनी का योगदान

मेजिनी :

मेजिनी साहित्यकार, गणतांत्रिक विचारों के समर्थक और योग्य सेनापति था।

मेजिनी में आदर्शवादी गुण अधिक और व्यावहारिक गुण कम थे।

1831 में उसने ‘यंग इटली‘ की स्थापना की, जिसने नवीन इटली के निमार्ण में महत्वपूर्ण भाग लिया।

इसका उद्देश्य इटली प्रायद्वीप से विदेशी हस्तक्षेप समाप्त करना तथा संयुक्त गणराज्य स्थापित करना था।

1834 में ‘यंग यूरोप‘ नामक संस्था का गठन कर मेजिनी ने यूरोप में चल रहे राष्ट्रीय आंदोलन को भी प्रोत्साहित किया।

1848 में जब फ्रांस सहित पूरे यूरोप में क्रांति का दौर आया तो मेटरनिख को ऑस्ट्रीया छोड़कर जाना पड़ा।

इसके बाद इटली की राजनीति में पुनः मेजिनी का आगमन हुआ।

मेजिनी सम्पूर्ण इटली का एकीकरण कर उसे एक गणराज्य बनाना चाहता था जबकि सार्डिनिया-पिडमाउंट का शासक चार्ल्स एलबर्ट अपने नेतृत्व में सभी प्रांतो का विलय चाहता था।

पोप भी इटली को धर्मराज्य बनाने का पक्षधर था।

इस तरह विचारों के टकराव के कारण इटली के एकीकरण का मार्ग अवरुद्ध हो गया था।

कालांतर में ऑस्ट्रीया द्वारा इटली के कुछ भागों पर आक्रमण किये जाने लगे जिसमें सार्डिनिया के शासक चार्ल्स एलबर्ट की पराजय हो गई।

ऑस्ट्रीया के हस्तक्षेप से इटली में जनवादी आंदोलन को कुचल दिया गया।

इस प्रकार मेजिनी की पुनः हार हुई और वह पलायन कर गया।

इटली के एकीकरण का द्वितीय चरण

विक्टर इमैनुएल :

1848 तक इटली में एकीकरण के लिए किए गए प्रयास असफल ही रहे।

इटली में सार्डिनिया-पिडमाउण्ट का नया शासक ‘विक्टर इमैनुएल‘ राष्ट्रवादी विचारधारा का था और उसके प्रयास से इटली के एकीकरण का कार्य जारी रहा।

अपनी नीतियां के कार्यान्वयन के लिए विक्टर ने ‘काउंट कावूर‘ को प्रधानमंत्री नियुक्त किया।

काउंट कावूर :

कावूर एक सफल कुटनीतिज्ञ एवं राष्ट्रवादी था। वह इटली के एकीकरण में सबसे बड़ी बाधा ऑस्ट्रीया को मानता था।

इसलिए उसने ऑस्ट्रीया को पराजित करने के लिए फ्रांस के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया।

1853-54 के क्रिमिया के युद्ध में कावूर ने फ्रांस की ओर से युद्ध में सम्मिलित होने के घोषणा कर दी जबकि फ्रांस इसके लिए किसी प्रकार का आग्रह भी नहीं किया था।

इसका प्रत्यक्ष लाभ कावूर को प्राप्त हुआ।

युद्ध समाप्ती के बाद पेरिस के शांति सम्मेलन में कावूर ने इटली में ऑस्ट्रीया के हस्तक्षेप को गैरकानूनी घोषित कर दिया।

कावूर ने नेपोलियन प्प्प् से भी एक संधि की जिसके तहत फ्रांस ने ऑस्ट्रीया के खिलाफ पिडमाउन्ट को सैन्य समर्थन देने का वादा किया।

बदले में नीस और सेवाय नामक दो रियासतें कावूर ने फ्रांस को देना स्वीकार कर लिया।

कावूर की दृष्टि में इटली का एकीकरण संभव नहीं था।

इसी बीच 1859-60 में ऑस्ट्रीया और पिडमाउण्ट में सीमा संबंधी विवाद के कारण युद्ध आरंभ हो गया।

युद्ध में इटली के समर्थन में फ्रांस ने अपनी सेना उतार दी जिसके कारण ऑस्ट्रीयाई सेना बुरी तरह पराजित होने लगी।

ऑस्ट्रीया के एक बड़े राज्य लोम्बार्डी पर पिडमाउण्ट का कब्जा हो गया।

काउंट कावूर :

एक तरफ तो लड़ाई लम्बी होती जा रही थी और दूसरी तरफ नेपोलियन इटली के राष्ट्रवाद से घबराने लगा था क्योंकि उŸार और मध्य इटली की जनता कावूर के समर्थन में बड़े जन सैलाब के रूप में आंदोलनरत थी।

नेपोलियन इस परिस्थिति के लिए तैयार नहीं था।

अतः वेनेशिया पर विजय प्राप्त होने के तुरंत बाद नेपोलियन ने अपनी सेना वापस बुला ली।

युद्ध से हटने के बाद नेपोलियन प्प्प् ने ऑस्ट्रीया तथा पिडमाउण्ट के बीच मध्यस्थता करने की बात स्वीकारी।

इस तरह संधि के अनुसार लोम्बार्डी पर पिडमाउण्ट का अधिकार और वेनेशिया पर ऑस्ट्रिया का अधिकार माना गया। अंततः एक बड़े राज्य के रूप में इटली सामने आया। परन्तु कावूर का ध्यान मध्य तथा उत्तरी इटली के एकीकरण पर था ।

अतः उसने नेपोलियन को सेवाय प्रदेश देने का लोभ देकर ऑस्ट्रिया पिडमाउण्ट युद्ध में फ्रांस के निष्क्रिय रहने तथा इटली के राज्यों का पिडमाउण्ट में विलय का विरोध नहीं करने का आश्वासन ले लिया।

बदले में नेपोलियन ने यह शर्त रख दी कि जिन राज्यों का विलय होगा वहाँ जनमत संग्रह कराये जायेंगे।

चूंकि उन रियासतों की जनता पिडमाउण्ट के साथ थी इसलिए कावूर ने कूटनीति का परिचय देते हुए इसे स्वीकार कर लिया।

1860-61 में कावूर ने सिर्फ रोम को छोड़कर उत्तर तथा मध्य इटली की सभी रियासतों (परमा, मोडेना, टस्कनी आदि) को मिला लिया तथा जनमत संग्रह कर इसे पुष्ट भी कर लिया।

ऑस्ट्रिया भी फ्रांस तथा इंग्लैंड द्वारा पिडमाउण्ट को समर्थन के भय से कोई कदम नहीं उठा सका। दूसरी तरफ ऑस्ट्रिया जर्मन एकीकरण की समस्या से भी जूझ रहा था।

इस प्रकार 1862 ई० तक दक्षिण इटली रोम तथा वेनेशिया को छोड़कर बाकी रियासतों का विलय रोम में हो गया और सभी ने विक्टर इमैनुएल को शासक माना।

गैरीबाल्डी :

इसी बीच महान क्रांतिकारी ’गैरीबाल्डी’ सशस्त्र क्रांति के द्वारा दक्षिणी इटली के रियासतों के एकीकरण तथा गणतंत्र की स्थापना करने का प्रयास कर रहा था।

गैरीबाल्डी पेशे से एक नाविक था और मेजिनी के विचारों का समर्थक था परन्तु बाद में कावूर के प्रभाव में आकर संवैधानिक राजतंत्र का पक्षधर बन गया।

गैरीबाल्डी ने अपने कर्मचारियों तथा स्वयं सेवकों की सशस्त्र सेना बनायी।

उसने अपने सैनिकों को लेकर इटली के प्रांत सिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किये। इन रियासतों की अधिकांश जनता बूर्वों राजवंश के निरंकुश शासन से तंग होकर गैरीबाल्डी की समर्थक बन गयी।

गैरीबाल्डी ने यहाँ गणतंत्र की स्थापना की तथा विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि के रूप में वहाँ को सत्ता सम्भाली।

1862 ई० में गैरीबाल्डी ने रोम पर आक्रमण की योजना बनाई तब कावूर ने गैरीबाल्डी के इस अभियान का विरोध किया और रोम की रक्षा के लिए पिडमाउण्ट की सेना भेज दी।

इसी बीच गैरीबाल्डी को भेंट कावूर से हुई और उसने रोम के अभियान की योजना त्याग दी। दक्षिणी इटली के जीते गए क्षेत्र को बिना किसी संधि के गैरीबाल्डी ने विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया।

गैरीबाल्डी को दक्षिणी क्षेत्र में शासक बनने का प्रस्ताव विक्टर इमैनुएल द्वारा दिया भी गया परन्तु उसने इसे अस्वीकार कर दिया।

वह अपनी सारी सम्पत्ति राष्ट्र को समर्पित कर साधारण किसान की भाँति जीवन जीने की ओर अग्रसित हआ। त्याग और बलिदान की इस भावना के कारण गैरीबाल्डी के चरित्र को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान खूब प्रचारित किया गया तथा लाला लाजपत राय ने उसकी जीवनी लिखी।

1862 ई० में दुर्भाग्यवश कावूर की मृत्यु हो गई और इस तरह वह भी पूरे इटली का एकीकरण नहीं देख पाया। रोम तथा वेनेशिया के रूप में शेष इटली का एकीकरण विक्टर इमैनुएल ने स्वयं किया।

1870-71 में फ्रांस और प्रशा के बीच युद्ध छिड़ गया जिस कारण फ्रांस के लिए पोप को संरक्षण प्रदान करना संभव नहीं था । विक्टर इमैनुएल ने इस परिस्थिति का लाभ उठाया। पोप ने अपने आप को बेटिकन सिटी के किले में बंद कर लिया। इमैनुएल ने पोप के राजमहल को छोड़कर बाकी रोम को इटली में मिला लिया और उसे अपनी राजधानी बनायी।

इस नई स्थिति को पोप ने तत्काल स्वीकार नहीं किया। इस समस्या का अंततः मुसोलिनी द्वारा निदान हुआ जब उसने पोप के साथ समझौता कर वेटिकन की स्थिति को स्वीकार कर लिया।

इस प्रकार 1871 ई० तक इटली का एकीकरण मेजिनी, कावूर, गैरीबाल्डी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं एवं विक्टर इमैनुएल जैसे शासक के योगदानों के कारण पूर्ण हुआ।

इटली में राष्ट्रवाद का प्रभाव

इटली में राष्ट्रवाद ने सम्पूर्ण यूरोप के साथ-साथ हंगरी, बोहेमिया, पोलैंड तथा यूनान में स्वतंत्रता आन्दोलन शुरू हो गये।

फ्रांस में राष्‍ट्रवाद पर नोट्स

वियना कांगेस क्या है ?

यूरोपीय देशों के राजदूतों का एक सम्मेलन था जो सितम्बर 18 से 14 जून 1815 को आस्ट्रिया की राजधानी वियना में आयोजित किया गया था।

नेपोलियन कौन था ?

नेपोलियन एक महान सम्राट था जिसने अपने व्यक्तित्व एवं कार्यों से पूरे यूरोप के इतिहास को प्रभावित किया।

अपनी योग्यता के बल पर 24 वर्ष की आयु में ही सेनापति बन गया।

उसने कई युद्धों में फ्रांसीसी सेना को जीत दिलाई और अपार लोकप्रियता हासिल कर ली फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और फ्रांस का शासक बन गया।

उदारवादी से क्या समझते हैं ?

उदारवादी लातिनी भाषा के मूल्य पर आधारित है जिसका अर्थ है ‘आजाद‘

उदारवाद तेज बदलाव और विकास को प्राथमिकता देता है।

रूढ़ीवादी से क्या समझते हैं ?

ऐसा राजनितिक दर्शन परंपरा, स्‍थापित संस्थाओं और रिवाजों पर जोर देता है और धीरे-धीरे विकास को प्राथमिकता देता है।

रूढ़ीवादी विचारधारा के लोग प्राचीन परम्‍परा को मानते हैं।

विचारधारा- एक खास प्रकार की सामाजिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण इंगित करने वाले विचारों का समुह विचारधारा कहलाता है।

वियना सम्मेलन- नेपोलियन के पतन के बाद यूरोप की विजयी शक्तियाँ ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में 1815 ई॰ में एकत्र हुई, जिसे वियना सम्मेलन के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य फिर से पुरातन व्यवस्था को स्थापित करना था। इस सम्मेलन का मेजबानी आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख ने किया।

मेटरनिख युग- वियना सम्मेलन के माध्यम से एक तरफ नेपोलियन युग का अंत तथा दूसरी तरफ मेटननिख युग की शुरुआत हुई। इसने इटली पर अपना प्रभाव स्थापित करने के लिए उसे कई राज्यों में विभाजित कर दिया। जर्मनी में 39 रियासतों का संघ कायम रहा। फ्रांस में भी पुरातन व्यवस्था की पुन: स्‍थापना की।

यूरोप में राष्ट्रवादी चेतना की शुरुआत फ्रांस से होती है।

नेपोलियन का शासनकाल

जब नेपोलियन फ्रांस पर अपना शासन चलाना शुरू किया तो उन्होंने प्रजातंत्र को हटाकर राजतंत्र स्थापित कर दिया।

नगरिक संहिता या नेपोलियन की संहिता 1804

  • कानून के समक्ष सबको बराबर रखा गया।
  • संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित रखा गया।
  • भू-दासत्व और जागीरदारी शुल्क से मुक्ति दिलाई।

जागीरदारी- इसके तहत किसानों, जमींदारों और उद्योगपतियों द्वारा तैयार समान का कुछ हिस्सा कर के रूप में सरकार को देना पड़ता था।

राष्ट्रवाद को निर्माण-

यूरोपीय समाज दो वर्गों में बँटा हुआ था-

  1. उच्च वर्ग – कुलीन वर्ग और 2. निम्न वर्ग – कृषक वर्ग

बीच में एक और वर्ग जुड़ गया। जिसे मध्यम वर्ग कहा गया।

16वीं शताब्दी से पहले यूरोपीय समाज दो वर्गों में विभाजित था।

वियना सम्मेलन

नेपोलियन के पतन के बाद यूरोप की विजयी शक्तियाँ ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में 1815 ई॰ में एकत्र हुई, जिसे वियना सम्मेलन के नाम से जाना जाता है।

इसका मुख्य उद्देश्य फिर से पुरातन व्यवस्था को स्थापित करना था।

इस सम्मेलन का मेजबानी आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख ने किया।

मेटरनिख ने इटली, जर्मनी के अलावा फ्रांस में भी पुरातन व्यवस्था की पुनर्स्थापना की।

लेकिन यह व्यवस्था स्थायी साबित नहीं हुई और जल्द ही यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार हुआ जिससे सभी देश प्रभावित हुए।

फ्रांस में वियना व्यवस्था के तहत क्रांति के पूर्व की व्यवस्था स्थापित करने के लिए बूर्वों राजवंश को पुनर्स्थापित किया गया तथा लुई 18 वाँ फ्रांस का राजा बना।

इसका मुख्य उद्देश्य फिर से पुरातन व्यवस्था को स्थापित करना था।

इस सम्मेलन का मेजबानी आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख ने किया।

मेटरनिख ने इटली, जर्मनी के अलावा फ्रांस में भी पुरातन व्यवस्था की पुनर्स्थापना की।

लेकिन यह व्यवस्था स्थायी साबित नहीं हुई और जल्द ही यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार हुआ जिससे सभी देश प्रभावित हुए।

लुई 18 वाँ ने फ्रांस की बदली हुई परिस्थितियों को समझा और फ्रांसीसी जनता पर पुरातनपंथी व्यवस्था स्‍थापित करने का प्रयास नहीं किया।

उसने प्रतिक्रियावादी और सुधारवादी शक्तियां के बीच सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से 2 जून 1814 को संवैधानिक घोषणापत्र जारी किए जो 1848 ई० तक फ्रांस में चलते रहे।

चार्ल्स-X के शासनकाल में कुछ परिवर्तन किए गए परन्तु इसका परिणाम 1830 की क्रांति के रूप में सामने आया।

जुलाई 1830 की क्रांतिः चार्ल्स-ग् एक निरंकुश और प्रतिक्रियावादी शासक था। उसने फ्रांस में उभर रही राष्ट्रीयता की भावना को दबाने का कार्य किया। उसके द्वारा पोलिग्नेक को प्रधानमंत्री बनाया गया। पोलिग्नेक ने समान नागरिक संहिता के स्थान के पर शक्तिशाली अभिजात्य वर्ग की स्थापना तथा उसे विशेषाधिकारों से विभूषित करने का प्रयास किया। प्रतिनिधि सदन और दूसरे उदारवादियों ने पोलिग्नेक के विरूद्ध गहरा असंतोष प्रकट किया। चार्ल्स-X ने इस विरोध के प्रतिक्रिया स्वरूप 25 जुलाई 1830 ई॰ को चार अध्यादेशों के द्वारा उदार तत्वों का गला घोंटने का प्रयास किया। इन अध्यादेशों के विरोध में पेरिस में क्रांति की लहर दौड़ गई और फ्रांस में 28 जून 1830 ई॰ को गृहयुद्ध आरम्भ हो गया। इसे ही जुलाई 1830 की क्रांति कहते हैं।

परिणाम- चार्ल्स-X राजगद्दी छोड़कर इंग्लैंड पलायन कर गया और इस प्रकार फ्रांस में बूर्वो वंश के शासन का अंत हो गया।

1830 की क्रांति का प्रभाव

इस क्रांति ने फ्रांस के सिद्धांतों को पुनर्जीवित किया तथा वियना काँग्रेस के उद्देश्यों को निर्मूल सिद्ध किया।

इसका प्रभाव सम्पूर्ण यूरोप पर पड़ा और राष्ट्रीयता तथा देशभक्ति की भावना का प्रस्फुटन जिस प्रकार हुआ उसने सभी यूरोपीय राष्ट्रों के राजनैतिक एकीकरण, संवैधानिक सूधारों तथा राष्ट्रवाद के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

इस क्रांति से इटली, जर्मनी, यूनान, पोलैंड एवं हंगरी में तत्कालीन व्यवस्था के प्रति राष्ट्रीयता के प्रभाव के कारण आन्दोलन उठ खड़े हुए।

आगे चलकर फ्रांस में लुई फिलिप के खिलाफ आवाज उठने लगी जिससे फ्रांस में 1848 की क्रांति हुई।

1848 की क्रांति

लुई फिलिप एक उदारवादी शासक था, उसने गीजो को प्रधानमंत्री नियुक्त किया, जो कट्टर प्रतिक्रियावादी था।

प्रधानमंत्री गीजो किसी भी तरह के वैधानिक, सामाजिक और आर्थिक सुधारों के विरुद्ध था।

लुई फिलिप ने पुँजीपति वर्ग के लोगों को साथ रखना पसंद किया, जो अल्पमत में थे।

उसके पास किसी भी तरह के सुधारात्मक कार्यक्रम नहीं था और नहीं उसे विदेश निति में कोई सफलता मिल रही थी।

उसके शासन काल में देश में भुखमरी एवं बेरोजगारी व्याप्त होने लगी, जिससे गीजो की आलोचना होने लगी।

सुधारवादियों ने 22 फरवरी 1848 ई० को पेरिस में थियर्स के नेतृत्व में एक विशाल भोज का आयोजन किया।

जगह-जगह अवरोध लगाए गए और लुई फिलिप को गद्दी छोड़ने पर मजबुर किया गया।

24 फरवरी को लुई फिलिप ने गद्दी त्याग किया और इंगलैंड चला गया।

उसके बाद नेशनल एसेम्बली ने गणतंत्र की घोषणा करते हुए 21 वर्ष से ऊपर के सभी व्यस्कों को मताधिकार प्रदान किया और काम के अधिकार की गारंटी दी।

1848 की क्रांति का प्रभाव

इस क्रांति ने न सिर्फ पुरातन व्यवस्था का अंत किया बल्कि इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हालैंड, स्वीट्जरलैंड, डेनमार्क, स्पेन, पोलैंड, आयरलैंड तथा इंगलैंड प्रभावित हुए।

इस प्रकार, फ्रांस की क्रांति सम्‍पन्‍न हुई।

14 शास्त्रकाराः | Shastrakara Objective

  1. शास्त्रकाराः

(शास्त्र रचयिता)

  1. न्यायदर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

(A) कपिल

(B) गौतम

(C) कणाद

(D) पतंजली

उत्तर- (B) गौतम

  1. आर्य भट्टीयम किसकी रचना है?

(A) पराशर की

(B) चरक की

(C) सुश्रुत की

(D) आर्यभट्ट की

उत्तर- (D) आर्यभट्ट की

  1. शास्त्र मानवों को किसका बोध कराता है?

(A) समझ

(B) कर्तव्याकर्तव्य

(C) मन

(D) चिंता

उत्तर- (B) कर्तव्याकर्तव्य

  1. वेदरूपी शास्त्र क्या होता है?

(A) अनित्य

(B) नित्य

(C) कृत्य

(D) भृत्य

उत्तर- (B) नित्य

  1. वराहमिहिर द्वारा रचित ग्रंथ कौन-सा है?

(A) आचार संहिता

(B) विचार संहिता

(C) वृहतसंहिता

(D) मंत्रसंहिता

उत्तर- (C) वृहतसंहिता

  1. ऋषयादि प्रणीत को क्या कहते हैं?

(A) भृतक

(B) मृतक

(C) कृतक

(D) हृतक

उत्तर- (C) कृतक

  1. ऋषि गौतम ने किस दर्शन की रचना की?

(A) सांख्य दर्शन

(B) न्याय दर्शन

(C) योग दर्शन

(D) चन्द्र दर्शन

उत्तर- (B) न्याय दर्शन

  1. निरुक्त का क्या कार्य है?

(A) यथार्थ बोध

(B) वेदार्थ बोध

(C) अर्थ बोध

(D) तत्त्व बोध

उत्तर- (B) वेदार्थ बोध

  1. शास्त्र किसके लिए कर्त्तव्‍य और अकर्तव्य का विधान करते हैं?

(A) दानवों के लिए

(B) मानवों के लिए

(C) छात्रों के लिए

(D) पशुओं के लिए

उत्तर- (B) मानवों के लिए

  1. मीमांसा दर्शन के रचनाकार कौन हैं?

(A) जैमिनी

(B) पाणिनी

(C) पराशर

(D) सुश्रुत

उत्तर- (A) जैमिनी

  1. महर्षि यास्क द्वारा रचित ग्रंथ का क्या नाम है?

(A) निरूक्तम्

(B) शुल्ब सूत्र

(C) न्यायदर्शन

(D) चरक संहिता

उत्तर- (A) निरूक्तम्

  1. भारतवर्ष में किसकी महती परम्परा सुनी जाती है?

(A) पुस्तक

(B) ग्रंथ

(C) शास्त्र

(D) कोई नहीं

उत्तर- (C) शास्त्र

  1. वर्ग में कौन प्रवेश करता है?

(A) शिक्षक

(B) छात्र

(C) प्राचार्य

(D) लिपिक

उत्तर- (A) शिक्षक

  1. किसके छः अंग हैं?

(A) रामायण

(B) महाभारत

(C) पुराण

(D) वेद

उत्तर- (D) वेद

  1. छात्र किसका अभिवादन करते हैं?

(A) शिक्षक

(B) बालक

(C) राजा

(D) छात्र

उत्तर- (A) शिक्षक

  1. किसका व्याकरण प्रसिद्ध है?

(A) व्यास

(B) पाणिनी

(C) चाणक्य

(D) आर्यभट्ट

उत्तर- (B) पाणिनी

  1. वेदांग कितने हैं?

(A) तीन

(B) पाँच

(C) छः

(D) चार

उत्तर- (C) छः

  1. ज्योतिष के रचयिता कौन हैं?

(A) व्यास

(B) पाणिनी

(C) लगधर

(D) यास्क

उत्तर- (C) लगधर

  1. कर्मकांड के रचनाकार कौन हैं?

(A) व्यास

(B) गौतम

(C) चाणक्य

(D) यास्क

उत्तर- (B) गौतम

  1. छंद के रचयिता कौन हैं?

(A) व्यास

(B) पाणिनी

(C) पिंगल

(D) यास्क

उत्तर- (C) पिंगल

13 विश्वशांति | Viswa Shanti Sanskrit Objective

विश्वशांति

  1. ईर्ष्या और असहिष्णुता किसको उत्पन्न करते हैं ?

(A) शांति

(B) अशांति

(C) सुख समृद्धि

(D) प्रेम

उत्तर- (B) अशांति

  1. वैर से वैर का समन क्या है ?

(A) संभव

(B) असंभव

(C) नाम्भव

(D) मुमकिन

उत्तर- (B) असंभव

  1. दुःख का विषय क्या है ?

(A) भ्रांति

(B) शांति

(C) अशांति

(D) अहिंसा

उत्तर- (C) अशांति

  1. परपीडन किस लिए होता है ?

(A) पुण्य के लिए

(B) पाप के लिए

(C) नाश के लिए

(D) धर्म के लिए

उत्तर- (C) नाश के लिए

  1. एक देश दूसरे देश को क्यों देखकर जलता है ?

(A) अपकर्ष

(B) उत्कर्ष

(C) आकर्ष

(D) पराकर्ष

उत्तर- (B) उत्कर्ष

  1. इस समय संसार किस महासागर के कूलमध्य स्थित दिख रहा है ?

(A) प्रशान्त महासागर

(B) हिन्द महासागर

(C) अशांति महासागर

(D) अटलांटिक महासागर

उत्तर- (C) अशांति महासागर

  1. विश्वशांति पाठ में किस वातावरण का चित्रण किया गया है ?

(A) अशांति

(B) शांति

(C) देशभक्ति

(D) वैज्ञानिक

उत्तर- (A) अशांति

  1. अशांति मानवता का क्या कर रही है ?

(A) उन्नति

(B) विनाश

(C) ऊपर

(D) नीचे

उत्तर- (B) विनाश

12 कर्णस्य दानवीरता | Karnsya Danveerta Objective

  1. कर्णस्य दानवीरता

(कर्ण की दानवीरता)

  1. ‘कर्णस्य दानवीरता‘ पाठ किस ग्रंथ से संकलित है ?

(A) कर्णभार से

(B) वासवदत्त से

(C) हितोपदेश से

(D) पुरूषपरिक्षा कथा ग्रंथ से

उत्तर- (A) कर्णभार से

2 ‘महत्तरां भिक्षा याचे‘ यह किसकी उक्ति है ?

(A) कर्ण की

(B) शल्य की

(C) कृष्ण की

(D) इन्द्र की

उत्तर- (D) इन्द्र की

  1. सूर्यपुत्र कौन था ?

(A) भीम

(B) अर्जुन

(C) कर्ण

(D) युधिष्ठिर

उत्तर- (C) कर्ण

  1. भास के कितने नाटक है ?

(A) 10

(B) 13

(C) 15

(D) 11

उत्तर- (B) 13

  1. कर्ण किसके पक्ष से युद्ध लड़ रहा था।

(A) कौरव

(B) पाण्डव

(C) राम

(D) रावण

उत्तर- (A) कौरव

  1. ब्राह्मण रूप में कौन प्रवेश किया ?

(A) इन्द्र

(B) विष्णु

(C) कृष्ण

(D) अर्जुन

उत्तर- (A) इन्द्र

  1. दानवीर कौन था ?

(A) भीम

(B) अर्जुन

(C) कर्ण

(D) युधिष्ठिर

उत्तर- (C) कर्ण

  1. कर्ण किस देश का राजा था ?

(A) अंग

(B) मगध

(C) मिथिला

(D) काशी

उत्तर- (A) अंग

  1. कर्ण किसका पुत्र था ?

(A) कुंती

(B) कौशल्या

(C) कैकेयी

(D) शकुन्तला

उत्तर- (A) कुंती

  1. भिक्षुक किस वेश में आया था ?

(A) राजा

(B) भिखारी

(C) मंत्री

(D) ब्राह्मण

उत्तर- (D) ब्राह्मण

  1. कवच और कुण्डल किसके पास था ?

(A) इन्द्र

(B) भीष्म

(C) कृष्ण

(D) कर्ण

उत्तर- (D) कर्ण

  1. कर्ण के कवच-कुण्डल की क्या विशेषता थी ?

(A) वह बड़ा था

(B) वह सोने के था

(C) वह बहुत चमकिला था

(D) उसे भेदा नहीं जा सकता था।

उत्तर- (D) उसे भेदा नहीं जा सकता था।

11 व्याघ्रपथिक कथा | Vyaghra Pathik Katha Objective

व्याघ्रपथिक कथा Objective

1. ‘इदं सुवर्ण कंकणं गृहताम्‘ किसने कहा ?

(A) पथिक

(B) कथाकार

(C) बाघ

(D) दानी

उत्तर- (C) बाघ

  1. ‘व्याघ्रपथिक कथा‘ पाठ में किसके दुष्परिणाम का वर्णन किया गया है ?

(A) क्रोध

(B) लोभ

(C) मोह

(D) काम

उत्तर- (B) लोभ

  1. ‘दरिद्रान्भर कौन्तेय! मा ……. नीरुजस्य किमौषधेः‘ पद्य किस पाठ से संकलित है ?

(A) अरण्यकाण्ड से

(B) व्याघ्रपथिक कथा से

(C) किष्किन्धा काण्ड से

(D) सुन्दर काण्ड से

उत्तर- (B) व्याघ्रपथिक कथा से

  1. ‘व्याघ्रपथिक कथा‘ किस ग्रंथ से लिया गया है ?

(A) पंचतंत्र

(B) हितोपदेश

(C) रामायण

(D) महाभारत

उत्तर- (B) हितोपदेश

  1. कौन स्नान किए हुए हाथ में कुश लिए तालाब के किनारे बोल रहा था ?

(A) व्याघ्र

(B) भालू

(C) बंदर

(D) मनुष्य

उत्तर- (A) व्याघ्र

  1. व्याघ्र के हाथ में क्या था ?

(A) संस्कृत पुस्तक

(B) वेद

(C) सुवर्ण कंगन

(D) गज

उत्तर- (C) सुवर्ण कंगन

10 मन्दाकिनीवर्णनम् | Mandakini Varnanam Objective

मन्दाकिनीवर्णनम्

  1. महर्षि बाल्‍मीकि ने किस नदी का वर्णन किया है ?

(A) बूढ़ी गंगा

(B) मन्दाकिनी

(C) यमुना

(D) कावेरी

उत्तर- (B) मन्दाकिनी

  1. बाल्मीकि रामायण से कौन-सा पाठ संकलित है ?

(A) विश्वशांतिः

(B) कर्णस्य दानवीरता

(C) नीतिश्लोकाः

(D) मन्दाकिनी वर्णनम्

उत्तर- (D) मन्दाकिनी वर्णनम्

  1. मन्दाकिनी वर्णनम् रामायण के किस काण्ड से संग्रहीत है ?

(A) अरण्यकाण्ड से

(B) अयोध्याकाण्ड से

(C) किष्किन्धा काण्ड से

(D) सुन्दर काण्ड से

उत्तर- (B) अयोध्याकाण्ड से

  1. वनवास प्रसंग में राम-सीता लक्ष्मण के साथ कहाँ पहुँचते हैं ?

(A) विचित्रकुट

(B) चित्रकुट

(C) स्वर्णकुट

(D) पर्णकुट

उत्तर- (B) चित्रकुट

  1. मन्दाकिनी नदी किस पर्वत के निकट बहती है ?

(A) मलय पर्वत

(B) मन्दार पर्वत

(C) चित्रकुट पर्वत

(D) हिमालय पर्वत

उत्तर- (C) चित्रकुट पर्वत

9 स्वामी दयानंदः | Swami Dyanand Objective

स्वामी दयानंदः

  1. स्वामी दयानंद ने किसके प्रचार में अपना जीवन समर्पित किया ?

(A) वैदिकधर्म

(B) सत्य

(C) ज्ञान

(D) शुद्धतत्त्व ज्ञान

उत्तर- (A) वैदिकधर्म

  1. स्वामी दयानंद की शिक्षा की शुरुआत किस भाषा माध्यम से हुई ?

(A) संस्कृत

(B) हिन्दी

(C) उर्दू

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर- (A) संस्कृत

  1. स्वामी दयानन्द के बचपन का नाम क्या था ?

(A) शंकर

(B) शिवशंकर

(C) मूलशंकर

(D) उमाशंकर

उत्तर- (C) मूलशंकर

  1. स्वामीदयानन्द ने किस नगर में आर्यसमाज की स्थापना की ?

(A) कोलकाता

(B) मुम्बई

(C) पटना

(D) चेन्नई

उत्तर- (B) मुम्बई

  1. स्वामी दयानंद का जन्म कब हुआ था ?

(A) 1822

(B) 1824

(C) 1826

(D) 1828

उत्तर- (B) 1824

  1. गुजरात-प्रदेश स्थित टंकाराग्राम किसका जन्मस्थल है ?

(A) स्वामी विवेकानन्दः

(B) स्वामी विरजानन्दः

(C) स्वामी दयानंदः

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर- (C) स्वामी दयानंदः

  1. स्वामी दयानन्द का जन्म किस ग्राम में हुआ था ?

(A) झंकारा

(B) टंकारा

(C) लंकारा

(D) भीखनटोला

उत्तर- (B) टंकारा

  1. ‘स्वामी दयानन्द‘ कौन थे ?

(A) आर्य समाज संस्थापक

(B) समग्र विकास संस्थान संस्थापक

(C) ब्रह्म समाज संस्थापक

(D) उपर्युक्त कोई नहीं

उत्तर- (A) आर्य समाज संस्थापक

  1. आर्य समाज के संस्थापक कौन थे ?

(A) स्वामी विवेकानंद

(B) स्वामी सरस्वत्यानन्द

(C) स्वामी विवेकानन्द

(D) स्वामी दयानन्द

उत्तर- (D) स्वामी दयानन्द

8. कर्मवीर कथा | Karmveer Katha Objective

कर्मवीर कथा

1. दलित ग्रामवासी पुरूष की कथा कौन है ?

(A) कर्मवीर कथा

(B) अलस कथा

(C) व्याघ्रपथिक कथा

(D) विश्वशांति

उत्तर- (A) कर्मवीर कथा

  1. ‘उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः‘ यह उक्ति किस पाठ से संकलित है ?

(A) कर्मवीर कथा

(B) व्याघ्र पथिक कथा

(C) भारतीय संस्काराः

(D) भारत महिमा

उत्तर- (A) कर्मवीर कथा

  1. कर्मवीर रामप्रवेश राम के परिवार के सदस्यों की कुल संख्या कितनी थी ?

(A) चार

(B) छह

(C) आठ

(D) दस

उत्तर- (A) चार

  1. ‘कर्मवीरकथा‘ समाज के किस वर्ग की कथा है ?

(A) धनी

(B) दलित

(C) कुलीन

(D) अल्पसंख्यक

उत्तर- (B) दलित

  1. भीखनटोला किस प्रांत में है ?

(A) बिहार

(B) उत्तर प्रदेश

(C) मध्य प्रदेश

(D) राजस्थान

उत्तर- (A) बिहार

  1. भिखन टोला देखने कौन आये ?

(A) शिक्षक

(B) राजनेता

(C) छात्र

(D) धार्मिक नेता

उत्तर- (A) शिक्षक

  1. लक्ष्मी किस प्रकार के व्यक्ति के पास आती है ?

(A) बलवान के पास

(B) ज्ञानवान के पास

(C) धूर्त के पास

(D) उद्योगी के पास

उत्तर- (D) उद्योगी के पास

  1. कर्मवीर कौन है ?

(A) रामप्रवेश राम

(B) जीतन राम

(C) बलराम

(D) जय राम

उत्तर- (A) रामप्रवेश राम