8. My Childhood class 10th English | मेरा बचपन

इस पोस्‍ट में हमलोग बिहार बोर्ड कक्षा 9 अंग्रेजी के पाठ आठ ‘My Childhood (मेरा बचपन)’ के प्रत्‍येक पंक्ति के अर्थ को पढ़ेंगे। ‘मेरा बचपन’ जो उनकी आत्मकथा ‘वींग्स ऑफ फायर’ से ली गई है, में उन्होंने अपने बचपन के दिनों पर प्रकाश डाला है।

My Childhood class 10th English

MY CHILDHOOD (मेरा बचपन)

Dr. A.P.J. Abdul Kalam

A. P. J. ABDUL KALAM was born in 1931. He specialized in Aeronautical Engineering from Madras Institute of Technology. After working for two decades in ISRO and mastering launch vehicle technologies, Dr. Kalam look up the responsibility of developing Indigenous Guided Missiles at the Defence Research and Development Programme. He was responsible for building indigenous capability and critical technologies through networking of multiple institutions, development and operationalization of Prithvi and Agni missiles. From july 1992 to December 1999, he was appointed Scientific Adviser to Defence Minister and was Secretary, Department of Defence Research and Development from July 1992 to December 1999. Pokhran Il nuclear tests, which made India a nuclear weapon state, was carried under him. He took up academics as a Professor of Technology and Societal Transformation in Anna University, Chennai in 2001. He has won many awards including the Padma Bhushan (1981), the Padma Vibhushan (1990) and the Bharat Ratna (1997). He became the eleventh President of India ov! 25 July, 2002 and succesfully completed his five year term as the Presdient of India.

            In ‘My Childhood’, taken from his autobiography ‘Wings of Fire’, he focuses on his childhood days.

डा. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जन्म 1931 में हुआ था। उन्होंने मद्रास प्रौद्योगिका संस्थान से एरोनटिकल इन्जिनियरिंग में विशेषता पाई। दो दशकों तक इसरो ओर वाहन आधायिका स प्रारम्भ करने के बाद, डॉ. कलाम ने रक्षा की खोज और उसके विकास के प्रक्रम के क्षेत्र में मिसाइल कार्यक्रम के पथ प्रदर्शक की जवाबदेही ले ली। वावाभन्न संस्थानों के विकास और पृथ्वी तथा अग्नि मिसाइलों के परीक्षण के माध्यम से देश का । सामर्थ्य और संकटकालीन- प्रौद्योगिकी के निर्माण के लिए जवाबदेह थे। जुलाई 1992 से दिसम्बर 1999 तक, रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त किए गए थे आर। रक्षा शोध एवं विकास के सचिव के पद पर नियुक्त किए गए थे और रक्षा, शोध एव विकास के सचिव के रूप में जुलाई, 1992 से दिसम्बर, 1999 तक कार्य किए। पोखरण II नाभिकीय परीक्षण, जिसने भारत को नाभिकीय शक्ति वाला देश बनाया, इन्हीं के संरक्षण में संपन्न हुआ था। उन्होंने 2001 में अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई में प्रौद्योगिकी और सोसल ट्रांसफॉर्मेशन के प्रोफेसर के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में कार्य शुरू किया। वे पद्म भूषण (1981), पद्म विभूषण (1990) और भारतरत्न (1997) सहित बहुत सारे। अलंकरणों से नवाजे गए। वे 25 जुलाई, 2002 को भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति बने और भारत के राष्ट्रपति के रूप में अपना पाँच साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया।

‘मेरा बचपन’ जो उनकी आत्मकथा ‘वींग्स ऑफ फायर’ से ली गई है, में उन्होंने अपने बचपन के दिनों पर प्रकाश डाला है।


Class 9th English Chapter 8 My Childhood Notes

Bihar Board Class 10th Social Science

1.I was born into a middle-class Tamil family in the island town of Rameswaram in the erstwhile Madras State. My father, Jainulabdeen, had neither much formal education nor much wealth, despite these disadvantages, he possessed great innate wisdom and a true generosity of spirit. He had an ideal helpmate in my mother, Ashiamma. I do not recall the exact number of people she fed every day, but I am quite certain that far more outsiders ate with us than all the members of our own family put together.

मेरा जन्म पूर्व मद्रास प्रांत में रामेश्वरम् के एक. द्वीप शहा एक मध्यमवर्गीय तमिल परिवार में हुआ था। मेरे पिताजी, जैनुलबदीन, न अधिक शिति थे और न अधिक धनी । इन असुविधाओं के बावजूद उनके पास स्वाभाविक धैर्य और उदारता की महान आत्मा निवास करती थी। मेरी माँ आशियामा की सहायता में उसके पास तब सुझाव था। मैं सही नहीं गिनती कर पाता कि वह कितने लोगों को प्रतिटिय खिलाती हैं। परन्तु मुझे पूरा यकीन है कि उससे अधिक बाहरी लोग हमारे साथ खाते थे जितना कि मेरे परिवार के सभी एक साथ खाते थे।

2.I was one of many children – a short boy with rather undistinguished looks, born to tall and handsome parents. We lived in our ancestral house, which was built in the middle of the nineteenth century. It was a fairly large pucca house, made of limestone and brick, on the Mosque Street in Rameswaram. My austere father used to avoid all inessential comforts and luxuries. However, all necessities were provided for, in terms of food, medicine or clothes. In fact, I would say mine was a very secure childhood, both materially and emotionally.

मैं अनेक बच्चों में से एक था-एक छोटा बालक जो वस्तुतः बड़े और सुंदर माता-पिता के यहाँ जन्म लेनेवालों में अंतर नहीं कर पाता था। हम अपने पूर्वजों के मकान में रहते थे, जो उन्नीसवी सदी के मध्य में बना था। यह बिल्कुल बड़ा तथा पक्का मकान था, जो रामेश्वरम् की मस्जिद गली में चना-पत्थर और ईट से बना था। मेरे कठोर। पिताजा सभी अनावश्यक सुविधा और सुख के संसाधनों के उपयोग का बहिष्कार करते। थे। इस प्रकार, सभी आवश्यकताएँ भोजन, दवाइयाँ और कपड़े में सीमित थीं। सचमुच, में कहूंगा कि मेरा बचपन बहुत सुरक्षित था, दोनों प्रकार से भौतिकवाद और भावनात्मक रूप से।

3.The Second World War broke out in 1939, when I was eight years old. For reasons I have never been able to understand, a sudden demand for tamarind seeds erupted in the market. I used to collect the seeds and sell them to a provision shop on Mosque Street. A day’s collection would fetch me the princely sum of one anna. My brother-in-law Jallaluddin would tell me stories about the War which I would later attempt to trace in the headlines in Dinamani.Our area, being isolated, was completely unaffected by the War. But soon India was forced to join the Allied Forces and something like a state of emergency was declared. The first casualty came in the form of the suspension of the train halt at Rameswaram station. The newspapers now had to be bundled and thrown out from the moving train on the Rameswaram Road between Rameswaram and Dhanus Rodi that forced my cousin Samsuddin, who distributed newspapers in Rameswarm, to look for a helping hand to catch the bundles and, as if naturally, I filled the slot. Samsuddin helped me ear my first wages. Half a century later, I can still feel the surge of pride in carning my own money for the first time.

जब मै आठ वर्ष का था, 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध की आग फैल गई। कारण में बिल्कुल समझने में सक्षम नहीं हूँ। बाजार मे इमली के बीज की। अचानक माँग तेजी से होने लगी। मैंने बीज जमा करना शुरू किया और मस्जिद गला में एक खाद्य-पदार्थ क दुकान में बेचने लगा। एक दिन में जमा किया हुआ शान से एक आने पर बिकने लगा। मेरे बहनोई जलालुद्दीन युद्ध की कहानी मुझे बतायी जिसे मैंने बाद में “दिनामानी’ के मुख्य अंश में पता लगाने की कोशिश की। हमारा क्षेत्र, क्योंकि एक द्वीप था, बिल्कुल युद्ध से अप्रभावित था। परन्तु शीघ्र ही भारत को मित्र सेनाओं में शामिल होने के लिए दबाव दिया जाने लगा और आपातकाल जैसी स्थिति की घोषणा कर दी गई थी। प्रथम दुर्घटना रामेश्वरम् स्टेशन पर रोज के ठहराव बंद करने के रूप में सामने आया। अब समाचारपत्रा के बण्डल बना दिए जाते थे और चलती ट्रेन से रामेश्वरम् रोड पर रामश्वरम् राड और धानुसक रोड के बीच में फेंक दिए जाते जिसने मेरे चचेरे भाई समसुद्दान, जो रामश्वरम् में अखबार बाटते थे को एक सहायता के लिए। एक आदमी की आवश्यकता के लिए बाध्य कर दिया जो बंडलों को पकड़े और मानो । स्वाभाविकता से मैंने उसे पूरा किया । समसुद्दीन ने मुझे मेरा पहला पारिश्रमिक कमाने में मदद की। आधी सदी के बाद, में आज भी अपने प्रथम परिश्रम से कमाई पर आगे बढ़ने । के बाद भी गर्व महसूस करता हूँ।

Class 9th English Chapter 8 My Childhood Notes

The Pace For Living Chapter in Hindi

4.Every child is born, with some inherited characteristics, into a specific socioeconomic and emotional environment, and trained in certain ways by figures of authority I inherited honesty and self-discipline from my father, from my mother, inherited faith in goodness and deep kindness and so did my three brothers and sister. I had three close friends in my childhood – Ramanadha Sastry, Aravindan und Sivaprakasan. All these boys were from orthodox Hindu Brahmin families. As children, ixone of us ever felt any difference amongst ourselves because of our religious differences and upbringing In fact, Ramanadha Sastry was the son of Pakshi Lakshmana Sastry, the high priest of the Rameswaram temple. Later, he took over the priesthood of the Rameswaram temple from his father, Aravindan went into the business of arranging transport for visiting pilgrims; and Sivaprakasan became a catering contractor for the Southern Railways.

प्रत्येक बच्चा में पूर्वजों के सामाजिक, आर्थिक और भावनाला वातावरण के गुण होते हैं और अपने पालनहार (पालनेवाले) के बताए रास्तों से गुजर प्रशिक्षित होता है। मैंने अपने माता और पिता से ईमानदारी और स्व-अनुशासन के गा सीखे। मैं और मेरे तीनों भाई और बहनों को भी अच्छाई और गहरी दयालुता में विश्वास है। गेरे बचपन में तीन गहरे मित्र थे-रामानाचा शास्त्री, अरविन्दन, शिव प्रकाशन । ये सभी लड़के रूढ़िवादी हिन्दू ब्राह्मण परिवार के थे। एक बच्चा के नाते । हम सब में से कोई भी धर्म और ऊँचे ओहदे के आधार पर भेदभाव नहीं मानता था। सचमुच, रामानाधा शास्त्री राजेश्वर मंदिर के बड़े पुजारी लक्ष्मण शास्त्री का बेटा था। बाद में, उसने अपने पिता से रामेश्वर मंदिर की महंथी ले ली। अरविन्दन तीर्थयात्रियों के लिए अवागमन के साधनो की व्‍यवस्‍था में लग गया और शिवप्रकाशन साउदर्न रेलवे में खान पान सेवा की ठीकेदारी करने लगा।

5.During the annual Shri Sita Rama Kalyanam ceremony, our family used to arrange boats with a special platform for carrying idols of the Lord from the temple to the marriage site, situated in the middle of the pond called Rama Tirtha which was near our house. Events from the Ramayana and from the life of the Prophet were the bedtime stories my mother and grandmother would tell the children in our family.

श्री सीताराम कल्याण समारोह के वार्षिक समारोह में हमारा। । परिवार एक विशिष्ट प्लेटफॉर्म से भगवान की मूर्तियों को नाव से मंदिर से विवाहस्थल

तक ढोने की व्यवस्था करता था, जो पोखर के बीच में स्थित रामतीर्थ कहा जाता था, ‘जो मेरे घर के नजदीक था। रामायण और पैगम्बर की महत्त्वपूर्ण घटनाएं होने के समय हमारी माँ और दादी परिवार के बच्चों से कहती थीं।

Class 9th English Chapter 8 My Childhood Notes

What is Wrong with Indian Films Lecture

6.One day when I was in the fifth standard at the Rameswaram Elementary School a new teacher came to our class. I used to wear a cap which marked me as a Muslim, and I always sat in the front row next to Ramanadha Sastry, who wore the sacred thread. The new teacher could not stomach a Hindu priest’s son sitting with a Muslim boy. In accordance with our social ranking as the new teacher saw it. I was asked to go and sit on the back bench. I felt very sad, and so did Ramanadhe Sastry. He looked utterly downcast as I shifted to my scat in the last row. The image of him weeping when I shifted to the last row left a lasting impression on me.

एक बार जब मैं रामेश्वरम् के प्रारम्भिक विद्यालय में पाँचवीं का छात्र था, एक नये शिक्षक मर वर्ग में आए। मैं टोपी पहनता था, जो मुझे मस्लिम होने की पहचान कराता था, और मैं हमेशा सामने रामानाधाशास्त्री के बाद के कतार में बैठता था जा धार्मिक धागोंवाला पोशाक पहनता था। नया शिक्षक यह सहन नहीं कर सका कि एक हिन्दू पुजारी का बेटा मुसलमान के साथ बैठे। जैसा कि नये शिक्षक का नजरिया था, हमारे समाज की एकरूपता की श्रेणी में रखने के लिए, मुझे पीछे के बेंच पर जाकर बैठने के लिए कहा। मुझे बहुत बुरा लगा और रामानाधा शास्त्री को भी। मैं अपनी सीट छोड़कर अंतिम पंक्ति में गया तो उसने बिल्कुल उदास होकर देखा। उसका चेहरा रोआँसा हो गया जब मैं अंतिम पंक्ति में गया, जिसने मुझ पर गहरा प्रभाव डाला।

7.After school, we went home and told our respective parents about the incident. Lakshmana Sastry summoned the teacher, and in our presence, told the teacher that he should not spread the poison of social inequality and communal intolerance in the minds of innocent children He bluntly asked the teacher to either apologise or quit the school. The teacher did not regret his behaviour, but the strong sense of conviction Lakshmana Sastry conveyed ultimately reformed this young teacher.

स्कूल के बाद, हमलोग घर गए और इस घटना के संबंध में अपने-अपने मातापिता को बताया । लक्ष्मण शास्त्री ने हम लोगों की उपस्थिति में शिक्षक को बुलवाया और शिक्षक को कहा कि उन्हें सामाजिक असमानता और धार्मिक अहिष्णुता का जहर अबोध बच्चों में नहीं फैलाना चाहिए। उन्होंने शिक्षक से स्पष्ट कहा कि या तो माफी मॉगिए या स्कूल छोड़ दीजिए । शिक्षक अपने व्यवहार पर पश्चाताप नहीं किया, परन्तु लक्ष्मण

शास्त्री के दृढ़ विश्वास ने आखिरकार इस युवा शिक्षक को सुधरने के लिए प्रेरित कर – ही दिया था।

8.On the whole, the small society of Rameswaram was very rigid in terms of the segregation of different social groups. However, my science teacher Sivasubramania Iyer, though an orthodox Brahmin with a very conservative wife, was something of a rebel. He did his best to break social barriers so that people from varying backgrounds could mingle easily. Ile used to spend hours with me and would say, “Kalam. I want you to develop so that you are on par with the highly educated people of the big cities.”

पूर्णरूपेण, रामेश्वरम् का छोटा समाज विभिन्न सामाजिक समुदाया म अलगाव के लिए बहुत दृढ़ था। फिर भी, मेरे विज्ञान के शिक्षक शिवसुब्रमन्या अय्यर, हालांकि वे रूढ़िवादी ब्राह्मण थे और उनकी पत्नी तो और भी रूढ़िवादी थीं, इसका विरोध करते थे। वह समाज के इस बंधन को तोड़ने के लिए कुछ करना चाहते थे ताकि लोग जो अलग-अलग हैं आसानी से मिल-जुल सकें । वे मेरे साथ घंटों रहने लगे और कहते “कलाम मै तुमको इतना विकसित करना चाहता हूँ ताकि तुम बड़े शहरों के ऊँचे पढ़े-लिखे लोगों के बराबर हो सको।”

9.One day, he invited me to him for a meal. His wife was horrified at the idea of a Muslim boy being invited to dine in her ritually pure kitchen. She refused to serve me in her kitchen. Sivasubramania Iyer was not perturbed, por did he get angry with his wife, but instead, served me with his own hands and sat down beside me to eat his meal. His wife watched us from behind the kitchen door. I wondered whether she had observed any difference in the way I ate rice, drank water or cleaned the floor after the meal. When I was leaving his house, Sivasubramania Iyer invited me to join him for dinner again the next weekend. Observing my hesitation, he told me not to get upset, saying, “Once you decide to change the system, such problems have to be confronted.” When I visited his house the next week, Sivasubramania Iyer’s wife took me inside her kitchen and served me food with her own hands.

एक दिन, उन्होंने मुझे अपने यहाँ खाना पर बुलाया। उनकी पत्नी उनके इस विचार पर आतंकित थीं कि एक मुसलगान लड़का उसके संस्कारित भोजनालय में भोजन के लिए आमंत्रित किया गया है। उसने मुझे अपनी रसोई में खाना देने से मना कर दिया । शिवसुबमन्या अय्यर इससे विचलित नहीं हुए, ना ही अपनी पत्नी पर गुस्सा किए, परन्तु इसके बदले, अपने हाथों से खाना परोसा और मेरे बगल में भोजन करने के लिए बैठ गए। उनकी पत्नी रसोईघर के पीछे के दरवाजे से सबकुछ देख रही थी। मैं चकित हो गया कि वह किसी अंतर के लिए ध्यान दे रही थी कि मैं चावल खाया, पानी पीया या खाना के उपरांत सतह को साफ किया। जब मैं उनके घर से वापस आ रहा था, शिवा सुबमन्यिा अय्यर ने अगले सप्ताह अपने साथ भोजन के लिए फिर आमंत्रित किया। मेरे हिचक को अध्ययन कर, उन्होंने मुझे कहा कि बिस्मित मत हो। बोले कि, “एक बार। तुमने व्यवस्था को बदलने का निर्णय करते हो, इस तरह की समस्याओं का सामना करना होगा।” जब मैं अगले सप्ताह उनके घर गया, शिवसुबमन्यिा अय्यर की पत्नी मुझे अपने रसोईघर में ले गई और अपने हाथों से खाना परोसा।

10.0Then the Second World War was over and India’s freedom was imminent. “Indians will build their own India.” declared Gandhiji. The whole country was filled with an unprecedented optimism. I asked my father for permission to leave Rameswaram and study at the district headquarters in Ramanathapuram.

द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो गया था और भारत की आजादी सन्निकट थी। भारतीय अपना भारत बनायेगे’ गाधीजी न घोषणा की। समूचा देश अदभुत आर्शिवाद से भर गया था। मैने अपने पिताजी से रामश्वरम छोड़ने तथा जिला मुख्यालय रामानाथपुरम में अध्ययन करने की अनुमति माँगी। Class 9th English Chapter 8 My Childhood Notes

Sanskrit Class 10th All Chapter

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