The Unity Of Indian Culture | कक्षा 10 अंग्रेजी पाठ 7 भाारतीय संस्‍कृति की एकता

इस पोस्‍ट में हमलोग बिहार बोर्ड कक्षा 10 अंग्रेजी के पाठ सात ‘The Unity Of Indian Culture(भाारतीय संस्‍कृति की एकता)’ के प्रत्‍येक पंक्ति के व्‍याख्‍या को पढ़ेंगे।

The Unity Of Indian Culture

Class 9 English Chapter 7 The Unity Of Indian Culture

THE UNITY OF INDIAN CULTURE

Humayun Kabir

Humayun Kabir was a famous poet, novelist, essayist and a renowned political thinker. He was a Cabinet Minister for Scientific Research and Cultural Affairs during Nehru’s Primeminstership. An Oxford product, he had the proud privilege of being elected president of the Oxford University Student’s Union. The present piece is an adapted version of Humayun Kabir’s lecture delivered in Baroda University. The lecture focuses on the glorious past of India’s culture and its rich heritage. It precisely reflects Kabir’s love and faith in the greatness of his motherland.

हुमायूँ कबीर प्रसिद्ध कवि, उपन्‍यासकार, निबन्‍धकार और जानेमाने राजनीतिक विचारक थे। वे नेहरू के प्रधानमंत्रित्‍व में साइंटिफिक रिसर्चऔर कल्‍चरल अफेयर्स के कैबिनेट मंत्री थे। ऑक्‍सफोर्ड में पढ़े उन्‍हें ऑक्‍सफोर्ड युनिवर्सिटी स्‍टुडेण्‍ट्स यूनियन का अध्‍यक्ष चुने जाने का गौरवपूर्ण विशेषाधिकार प्राप्‍त था। वर्तमान अंश बड़ौदा विश्‍वविद्यालय में हुमायूँ के दिए गए व्‍याख्‍याान का अंगीकृत रूपान्‍तर है। यह व्‍याख्‍यान भारत की संस्‍कृति के गौरवपूर्ण अतीत और समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालता है। वह अपनी मातृभूमि की महत्ता में कबीर के प्रेम और आस्‍था को संक्षिप्‍त रूप से प्रतिबिम्बित करता है।

THE UNITY OF INDIAN CULTURE

Till recently, the Aryans were regarded as the earliest invaders of the land. It was thought that they came to a country which was uncivilised  and barbarian, but modern research has proved that there were invaders even before the Aryans poured into this land. They had evolved a civilization higher than that of the Aryan hordes who came in their wake. These Pre-Aryans had displaced still earlier people and built up new civilization which has astonished modern scholars by its extent and depth. The Aryan invasion repeated the process and led to fresh infusion of the old with the new. This continued with the successive inroads of fighting races who came to conquer but remained to lose themselves in the Indian racial cauldron. The Greek invaders were followed by Sakas and Huns and a hundred other nameless tribes. They all appeared on the scene as victors but were soon absorbed in the ranks of the vanquished.

कुछ समय पहले तक यह माना जाता था कि आर्यन्स यहाँ आने वाले सबसे पहले लोग हैं। वे जब आए थे तो पूरा देश असभ्य था परन्‍तु नयी खोज ने यह साबित किया है कि इनसे पहले भी लोग यहाँ आए थे। इनकी सभ्यता आर्यन्स से भी ऊँचे दरजे की थी। ये भी जब आए तो उस समय के लोगों को हटाया और अपनी सभ्यता स्थापित की जिसकी गहराइयों ने सभी को अचंभित कर दिया है। आर्यन्स ने इस प्रक्रिया को जारी रखा और नये-पुराने का मेल करते रहे। इसके बाद कई लोग आए पर कोई भी इन सा मजबूत नहीं हो सका और भारतीय संस्कृति में शामिल नहीं हो सका। ग्रीक्स के बाद सक और हुन्स और कई बेनाम प्रजाति आए। वे सब यहाँ विजेता के रूप में आए पर जल्द ही विलुप्त हो गए।

Today, whatever is Indian, whether it be an idea, a word, a form of art, a political institution or a social custom, is a blend of many different strains and elements.

Bihar Board Class 10th Social Science

आज, जो भी भारतीय है, चाहे सह सोच हो, एक शब्द, एक रूप कला का, एक राजनैतिक संगठन या एक सामाजिक प्रथा, सब कई पहलुओं का मिश्रण का परिणाम है।

In spite of this derivation from many sources and the consequent variety of forms and types we find a remarkable unity of spirit informing Indian culture throughout the ages. In fact, it is this underlying unity which is one of the most remarkable features of Indian culture. In volume and duration no civilization (with the possible exception of the Chinese) can bear comparison with the civilization of India. The area of the land, the number of the people, the variety of the races and the length of the India’s history are hardly repeated elsewhere. The vitality of Indian culture is equally amazing. In spite of a thousand vicissitudes, it has survived to the modern day. This has been possible only on account of a sense of Indianness which imposed unity on all diversity and wove into one fabric of national life the many strands of different texture, colour and quality which have entered here.

इन सब विभिन्नताओं के बावजूद हमेशा से ही भारतीय संस्कृति की अपनी एक पहचान रही । वास्तव में यह अन्तर्हित एकता है जो भारतीय संस्कृति के प्रमुख गुणों में एक है। मात्रा और अवधि में कोई सभ्यता (संभवतः चीन के अपवाद के साथ) भारत की सभ्यता के साथ तुलना नहीं वहन कर सकता। भूमि का क्षेत्र, लोगों की संख्या, प्रजातियों की विविधता और भारत के इतिहास की लम्बाई मुश्किल से कहीं दुहराए गए हैं। भारतीय संस्कृति की महत्ता समान रुप से आश्चर्यजनक है।

इसका महत्त्व भी बहुत है। इतनी बदलावों के बाद भी भारतीयता, अभी भी है। ये सिर्फ सम्भव हो सका है क्योंकि सब ‘अनेकता में एकता’ – में विश्वास करते हैं जो कि सभी विभिन्न पहलुओं को एक ही धागे, देश प्रेम का, में बाँधे रखता है।

The ancient world threw up fine flowers of dreilizationcin many lands. With the exception of India and China, they are dead and gone.

The Pace For Living Chapter in Hindi

It is only in India and to some extent in China that the old civilization and culture have grown and changed but never grown or changed at the expense of an underlying unity. This has been possible only through the capacity of readjustment exhibited by the Indian society.

पुराना दुनिया में कई सभ्यताएं कई जगहों पर आईं। भारत और चीन को छोड़कर सब खत्म हो गई है। इन दो दशा में सभ्यताओं में इतना ।। बदलाव कभी नहीं आया कि ये पूर्णतः बदल जाएँ। ये सम्भव हो सका है क्योंकि हमारे समाज में एक दूसरे को समझने की भावना है।

One ground of this adjustment is found in the spirit of toleration that has characterised Indian history throughout the ages “Live and let live” has been the policy of the Indians in all spheres of life. Sometimes this has been carried so far that contrary, if not contradictory, attitudes have been allowed to survive simultaneously. Toleration had led to the sufferance, of civil and even indifference to the values of life. This however, is at worst the defect of a virtue. Such toleration is perhaps preferable to the fanatic devotion which leads to the denial and persecution of all other values but its own.

एक तो समायोजन का आधार बर्दाश्त करने की भावना में दीखता है, हमेशा से हम मानते आए हैं ‘जीओ और जीने दो’। कभी-कभी ये । इतना गहरा है कि अलग-अलग सोच साथ-साथ रह सकते हैं। इसकी वजह से लोगों को झेलना भी पड़ता है। दिवाने इसे इतना गहरा मानते हैं कि वो किसी और को महत्त्व नहीं देते पर सिर्फ अपनी सभ्यता को।

भारतीय इतिहास के पूरे काल में हमें एकता देखने को मिलता है जो अलग-अलग रूप के बारे में बताते हैं लेकिन ये एकता हमेशा एक जैसा नहीं रहा है।

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Throughout the changes of Indian history we therefore find ospeit of underlying unity which informs the diverse expressions of institut the unity was never a dead uniformity, a living unity never is.

सभ्यता तब सही और महत्त्वपूर्ण हो सकती है जब उसमें एकता और विश्व भर में मान्यता हो। संस्कृति की व्याख्या करना बहुत कठिन है। क्योकि कोई एक चीज को इसका जान नहीं कहा जा सकता है।

Unity and universality must belong to any culture that is true and vital. Now culture is a concept which cannot be simply or unitarily defined. There is no single character or mark which can be regarded as the essence or distinctive feature of culture. It is always a complex of many strands of varying importance and vitality. If we attempt to differentiate between culture and civilization of life which makes civil society possible, culture, on the other hand, is the resultant of such organisation and expresses itself through language and art, through philosophy and religion, through social habits and customs and through political institutions and economic organisations. Not one of them is separately culture, but collectively they constitute the expression of life which we describe as culture. Culture is the efflorescence of civilization. Civilization is the organisation of society which creates the condition of culture. There can, therefore, be no culture without civilization, but there may be civilization which have not yet developed their culture. Perhaps what is more often the case is that there are civilised people among whom only a small section has achieved culture. We have, therefore, had and still have races and nations that are civilised;

but, except for India, we have not yet had any nation or race that could be regarded as cultured in all its sections and classes, for here in India, culture is almost as extensive as civilization.

एकता और सार्वजनीकता किसी संस्कृति के साथ होना चाहिए जो सत्य और महत्वपर्ण है। संस्कृति वैसी धारणा है जो सरलता से या एकात्मकता से परिभाषित नहीं हो सकती। ऐसी कोई विशेषता या चिह्न नहीं है जो संस्कृति के सार या खास गुण के रुप में माना जा सक। यह भिन्नतापूर्ण महत्व और महत्ता के अनेक धागे का मिश्रण है। कई तत्वों को अगर हम विभिन्नताएँ निकाले संस्कृति और सभ्यता में जिससे समाज बनता है तो संस्कृति को ऐसे संगठन का परिणाम पाते हैं जो खुद को भाषा और कला, फिलोसफि और धर्म, सामाजिक रीति-रिवाज और आदतें, । राजनैतिक संगठन और आर्थिक संगठन के द्वारा व्यक्त करते हैं । ये सब मिलकर संस्कृति बनाते हैं। कोई एक नहीं संस्कृति सभ्यता की खूबसूरती को बढ़ाता है। सभ्यता समाज का हाल है जो संस्कृति को जगह देता है। इसलिए सभ्यता के बगैर कोई संस्कृति नहीं हो सकती पर ऐसी सभ्यता हो सकती है जिसकी संस्कृति न हुआ हो। कई ऐसे लोग हैं जो सभ्य हैं पर संस्कृति पर पकड़ नहीं है। हमारे पास कई जातियाँ और देश हैं जो सभ्य तो हैं पर संस्कृति रूप से बहुत आगे नहीं हैं पर भारत में दोनों ही हैं क्योंकि यहाँ संस्कृति को भी उतना ही महत्त्व दिया जाता है जितना । सभ्यता को ।

Sanskrit Class 10th All Chapter

The experience of European countries gives us cases of civilization without culture. In India, on the other hand, even the casual tourist has observed that the difference between the masses and classes is not one of quality and can be explained in terms of information and opportunity. It is often otherwise in Europe. There the difference in quality between the masses and the classes is at times so great that it has shaken the faith of the most fervent of democrats.

युरोपियन देशों का अनुभव कई सभ्यता दिखाता है जो संस्कृति के बगैर है। भारत में एक साधारण पर्यटक भी देख सकता है। लोगों (सामान्य और ऊँचे दरजे वाले) में जानकारी और अवसर का अन्तर है ताकि किसी और चीज का। युरोप में गुण का विभाजन इतना है कि प्रजातंत्र से जलने वाले भी हिल गए हैं।

The remarkable phenomenon can be explained only in terms of the unity and continuity of Indian culture. Unity is, in one sense, the common characteristic of all culture. What specially distinguishes the culture of India is its unbroken continuity. Here, there have been no violent or sudden breaks, but on the contrary, a steady growth and extension of culture which has gradually permeated every class and section of society.

विशिष्ट घटना मात्र भारतीय संस्कृति की एकता और निरन्तरता की शर्त पर बतायी जा सकती है। एक अर्थ में एकता सभी सभ्यताओं का सामान्य स्वभाव है, जो खास रुप में भारत की संस्कृति की पहचान बताती है, वह है इसकी अटूट निरन्तरता । यहाँ कोई प्रचंड या आकस्मिक विखण्डन नहीं हुआ है, बल्कि संस्कृति का सतत विकास और विस्तार हुआ है जिसने समाज के हरेक वर्ग और खण्ड का क्रम से फैलाव किया है।

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